अगर आप पारंपरिक पेट्रोल या डीजल कार से किसी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पर शिफ्ट करने की सोच रहे हैं, तो ईंधन के खर्च के अलावा एक और बड़ा अंतर है जिसके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए। और वह है कार इंश्योरेंस (वाहन बीमा)।
- कानूनी रूप से अनिवार्यता: बुनियादी ढांचे की बात करें तो दोनों तरह की गाड़ियों के लिए कानूनन थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना अनिवार्य है। यह पॉलिसी थर्ड-पार्टी को होने वाले नुकसान, चोट या मृत्यु के मामलों में कवरेज देती है।
- फिर अंतर कहां है? हालांकि बेसिक नियम एक जैसे हैं, लेकिन रिपेयरिंग कॉस्ट, पार्ट्स और प्रीमियम के मामले में दोनों के बीमा में जमीन-आसमान का फर्क होता है।
पेट्रोल कार और ईवी बीमा में मुख्य अंतर क्या हैं?
नीचे दी गई तालिका से आप दोनों के बीमा खर्च और तकनीकी अंतर को आसानी से समझ सकते हैं:
| फीचर्स / मापदंड |
पेट्रोल / डीजल कार इंश्योरेंस |
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इंश्योरेंस |
| मुख्य महंगे पार्ट्स |
इंजन, गियरबॉक्स और ट्रांसमिशन |
हाई-वोल्टेज बैटरी पैक, इलेक्ट्रिक मोटर और विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स |
| रिपेयरिंग का खर्च |
पारंपरिक रिपेयरिंग और सामान्य मैकेनिक |
हाई-वोल्टेज सिस्टम और बैटरी के कारण विशेष तकनीक और प्रशिक्षित मैकेनिक की जरूरत |
| बैटरी कवर |
लागू नहीं (इंजन कवर होता है) |
दुर्घटना में बैटरी खराब होने पर कवर मिलता है, लेकिन सामान्य डिग्रेडेशन (घिसावट) शामिल नहीं |
| चार्जिंग उपकरण |
ईंधन टैंक / सामान्य हिस्से |
चार्जिंग केबल और होम/पोर्टेबल चार्जर महंगे होते हैं, जिनके लिए अलग से कवर की जरूरत पड़ सकती है |
| प्रीमियम तय करने का आधार |
कार की कीमत (IDV), मॉडल और क्लेम हिस्ट्री |
कार की कुल वैल्यू (IDV), बैटरी की कीमत और स्पेशलाइज्ड रिपेयर नेटवर्क की उपलब्धता |
EV इंश्योरेंस लेते समय किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए?
नई इलेक्ट्रिक कार का बीमा लेते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज न करें:
- बैटरी कवरेज को विस्तार से समझें: व्यापक (कॉम्प्रीहेंसिव) इंश्योरेंस होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बैटरी से जुड़ी हर समस्या कवर होगी। यदि एक्सीडेंट में बैटरी क्षतिग्रस्त होती है, तो क्लेम मिल जाएगा। हालांकि, समय के साथ बैटरी की क्षमता (रेंज) कम होना 'सामान्य टूट-फूट' माना जाता है, जो आमतौर पर वारंटी के दायरे में आता है। इंश्योरेंस में नहीं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले बैटरी के नियम व शर्तें ध्यान से पढ़ें।
- चार्जिंग केबल्स और उपकरणों का कवर: पेट्रोल कारों के उलट ईवी के साथ महंगे चार्जिंग इक्विपमेंट आते हैं। जांच लें कि आपका स्टैंडर्ड इंश्योरेंस इन केबल्स को कवर करता है या नहीं। यदि इसके लिए अलग से 'ऐड-ऑन' की जरूरत है, तो उसका खर्च जरूर जांच लें।
- IDV और प्रीमियम का गणित: चूंकि इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी और तकनीक महंगी होती है, इसलिए इनकी IDV और प्रीमियम पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा हो सकता है। केवल सबसे सस्ता बीमा चुनने के बजाय यह देखें कि उस कीमत में आपको क्या-क्या बेनिफिट्स मिल रहे हैं और क्या बाहर रखा गया है।