पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान लोग तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर रुख कर रहे हैं। सड़कों पर अब इलेक्ट्रिक स्कूटर से लेकर इलेक्ट्रिक कारें दिखना सामान्य हो गया है। लेकिन नई EV खरीदने के कुछ महीने बाद ही कई लोग शिकायत करने लगते हैं कि गाड़ी पहले जितनी रेंज नहीं दे रही।
ज्यादातर लोग इसके लिए कंपनी को दोष देते हैं, जबकि कई बार वजह चार्जिंग की हमारी अपनी आदतें होती हैं। अनजाने में की गई ये गलतियां बैटरी की सेहत बिगाड़ देती हैं और रेंज धीरे-धीरे घटने लगती है। आइए जानते हैं, वे कौन-सी गलतियां हैं जिसे करने से बचना जरूरी है।
क्यों बार-बार फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करना है गलत?
समय बचाने के चक्कर में कई लोग हर बार पब्लिक DC फास्ट चार्जर का ही सहारा लेते हैं। यह गाड़ी को एक घंटे से भी कम समय में चार्ज कर देता है, लेकिन रोज इसका इस्तेमाल बैटरी के लिए ठीक नहीं है। फास्ट चार्जिंग के दौरान बैटरी में बहुत तेज करंट जाता है, जिससे अंदर काफी गर्मी पैदा होती है। यह गर्मी लिथियम-आयन सेल्स को धीरे-धीरे कमजोर करती जाती है।
हर बार 100% चार्ज करना और 0% तक चलाना सही नहीं
कई लोग बैटरी को हर बार पूरा 100 प्रतिशत चार्ज करते हैं और जब तक वह 0 पर आकर बंद न हो जाए, दोबारा चार्ज नहीं करते। ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैटरी की लंबी उम्र के लिए '20-80 का नियम' सबसे अच्छा माना जाता है। यानी बैटरी 20 प्रतिशत के आसपास पहुंचते ही चार्जिंग पर लगा दें और 80 प्रतिशत होते ही प्लग निकाल लें।
गर्म बैटरी को तुरंत चार्जिंग पर बड़ी गलती
लंबी ड्राइव के बाद घर पहुंचते ही गाड़ी को सीधे चार्जिंग सॉकेट से जोड़ देना भी एक बड़ी गलती है। लगातार कई किलोमीटर चलने के बाद बैटरी और मोटर अंदर से गर्म हो चुके होते हैं। ऐसे में तुरंत चार्जर लगाने से तापमान और बढ़ जाता है। इससे बैटरी के अंदर होने वाली केमिकल रिएक्शन पर बुरा असर पड़ता है और उसकी चार्ज होल्ड करने की क्षमता घटने लगती है। सही तरीका यह है कि कहीं से लौटने के बाद गाड़ी को कम से कम 30 से 45 मिनट छांव में खड़ा रहने दें। जब बैटरी का तापमान सामान्य हो जाए, तभी चार्जिंग पर लगाएं। इसी तरह चार्जिंग पूरी होने के तुरंत बाद भी गाड़ी लेकर न निकलें, कुछ देर का गैप जरूर दें।
तेज धूप में चार्जिंग से बचें
भारत में गर्मियों में तापमान काफी ऊपर चला जाता है। ऐसे में EV को सीधी धूप में खड़ा करके चार्ज करना रेंज को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि लिथियम-आयन बैटरियां ज्यादा तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। तेज धूप में चार्जिंग से थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम पर दोगुना दबाव पड़ता है। इससे चार्जिंग धीमी होती है और बैटरी की उम्र भी घटती है। कोशिश करें कि गाड़ी को किसी शेड में या रात के ठंडे मौसम में ही चार्ज करें।
एक्सटेंशन बोर्ड और लोकल चार्जर का इस्तेमाल न करें
घर में चार्जर की केबल छोटी पड़ने पर कई लोग सस्ते लोकल एक्सटेंशन बोर्ड का सहारा ले लेते हैं। कई बार ओरिजिनल चार्जर खराब होने पर बाजार से सस्ता एडाप्टर भी खरीद लिया जाता है। लोकल चार्जर सही वोल्टेज सप्लाई नहीं दे पाते, जिससे न सिर्फ बैटरी सेल्स खराब होते हैं, बल्कि शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बना रहता है। इसलिए हमेशा कंपनी का दिया ओरिजिनल चार्जर और डेडिकेटेड पावर सॉकेट ही इस्तेमाल करें।
क्या करें और क्या न करें
- रोजाना फास्ट चार्जर पर निर्भर न रहें, जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करें।
- बैटरी को 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखने की कोशिश करें।
- ड्राइव के बाद गाड़ी को ठंडा होने दें, फिर चार्ज करें।
- धूप में नहीं, छांव या रात में चार्ज करें।
- ओरिजिनल चार्जर और अलग पावर सॉकेट का ही इस्तेमाल करें।