अगर भारत के आस-पास के देशों को देखा जाए तो चीन के बाद भारत ही सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भारत से कहीं अधिक है। जबकि भारत में भी पिछले कुछ सालों से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी आई है। लेकिन भारत का एक पड़ोसी देश ऐसा है जो अर्थव्यवस्था में तो उससे कहीं छोटी है लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ चुका है।
दरअसल, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के मामले में नेपाल ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। नेपाल में बिकने वाली 83% नई कारें कारें इलेक्ट्रिक (EV) हैं। यानी नेपाल में बिकने वाली हर 100 नई कारों में से 83 बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारें हैं। जानकारों का मानना है कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता, सस्ती लागत और सरकार की सहायक नीतियों ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता ने न केवल पारंपरिक वाहनों को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि नेपाल को EV अपनाने वाले देशों की लाइन में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।
नेपाल में इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से बढ़ता बाजार
वर्तमान में नेपाल की सड़कों पर लगभग 45,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे हैं। ये आंकड़े भारत की बिक्री की तुलना में भले ही कम लगे, लेकिन नेपाल ईवी पेनिट्रेशन में भारत के मुकाबले कहीं आगे निकल चुका है। भारत के मैजूदा कार मार्केट में इलेक्ट्रिक कारें केवल 5% हैं। नेपाल की बात करें तो, 2022–23 के वित्तीय वर्ष में नेपाल ने 4,050 इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों का आयात किया। इसके अलावा, 6,914 इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन भी आयात किए गए। इस तेजी से बढ़ते बाजार के कारण, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का अनुपात 60% हो गया है।
नेपाल में EV अपनाने की वजहें
नेपाल में इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल 10% आयात कर (इम्पोर्ट ड्यूटी) लगता है, जबकि पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों पर यह कर 238% तक पहुंच जाता है। यह बड़ा अंतर इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है।
इसके अलावा, नेपाल अपनी बिजली का 90% से अधिक हिस्सा हाइड्रोपावर (Hydropower) प्लांट्स से प्राप्त करता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए नेपाल के लोगों को बिजली सस्ती दरों पर उपलब्ध है। इससे नेपाल हर साल पेट्रोल और डीजल के आयात पर लाखों डॉलर की बचत कर लेता है।
इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तुलना में सस्ते और कम खर्चीले होते हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो एक इलेक्ट्रिक कार केवल 30 kWh की ऊर्जा में 160 किलोमीटर तक चल सकती है, जो पारंपरिक पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में इसे काफी किफायती विकल्प बना देता है।
सार्वजनिक परिवहन में EVs की बढ़ती भागीदारी
नेपाल में इलेक्ट्रिक वाहन केवल निजी उपयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। काठमांडू, पोखरा और नेपालगंज जैसे प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। इसके अलावा, बागमती प्रांत ने एक नई पहल के तहत घोषणा की है कि अब सभी नए टैक्सियों को इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य है।
हालांकि, सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में EVs को पूरी तरह से अपनाने के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में ध्यान दिया जाए, तो नेपाल सार्वजनिक परिवहन के मामले में एक मिसाल कायम कर सकता है।