भारत में सेकेंड-हैंड या प्री-ओन्ड (Pre-Owned) वाहनों का बाजार हर साल तेजी से बढ़ रहा है। मध्य-आय वर्गीय परिवारों के लिए कम शुरुआती लागत के कारण पुरानी कारें एक लोकप्रिय विकल्प बन चुकी हैं। हालांकि, भारत में पुरानी कार खरीदना, बेचना और उसका रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर (RC Transfer) कराना कितना आसान है, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस राज्य में रहते हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा द्वारा हाल ही में जारी की गई 'इज ऑफ व्हीकल ओनर्सशिप इंडेक्स' (Ease of Vehicle Ownership Index - EVOI) रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। इंडिया टेक डॉट ओआरजी (IndiaTech.org) और उपभोक्ता संगठन कंज्यूमर वॉयल (Consumer VOICE) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई इस रिपोर्ट में देश के 15 प्रमुख राज्यों का विश्लेषण किया गया है। जो भारत के संगठित यूज्ड-कार बाजार का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करते हैं।
प्रयुक्त वाहनों के ट्रांसफर में कौन-सा राज्य आगे है और कौन सबसे पीछे?
रिपोर्ट के अनुसार, वाहनों के सुगम ट्रांसफर और पारदर्शी प्रक्रियाओं के मामले में राज्यों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य: 10 में से 5.91 स्कोर के साथ आंध्र प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद केरल (5.74) दूसरे और तमिलनाडु (4.58) तीसरे स्थान पर हैं। दिल्ली 4.58 स्कोर के साथ चौथे और कर्नाटक पांचवें स्थान पर है।
- सबसे खराब प्रदर्शन वाले राज्य: इस सूची में उत्तर प्रदेश (2.47) सबसे निचले पायदान पर है। बिहार (2.51) और पश्चिम बंगाल (2.56) भी आखिरी तीन राज्यों में शामिल हैं।
- ओवरऑल स्थिति: रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी राज्य 6 का स्कोर पार नहीं कर सका। केवल दो राज्यों ने 5.5 से अधिक स्कोर किया, जिससे स्पष्ट होता है कि पूरे देश में यूज्ड-कार ट्रांसफर इकोसिस्टम में ढांचागत चुनौतियां मौजूद हैं।
पुरानी गाड़ियों के ट्रांसफर में मुख्य समस्याएं और असली लागत क्या है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि आरसी ट्रांसफर की प्रक्रिया में अतिरिक्त खर्च और कागजी जटिलता सबसे बड़ी कमजोरी है:
- सरकारी शुल्क से 10 गुना ज्यादा खर्च: कागजी प्रक्रियाओं, मैनुअल वेरिफिकेशन और दलालों के कारण वास्तविक लागत सरकारी फीस से लगभग 10 गुना तक बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु के होसुर आरटीओ पर 800 रुपये की सरकारी फीस के बदले 7,000 रुपये से 8,000 रुपये तक वसूल लिए जाते हैं। वहीं, बिहार में VAHAN पर तय फीस के ऊपर 13,000 रुपये से 14,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आता है।
- समय और दोहरी प्रक्रिया: आंध्र प्रदेश में बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए जहां आरसी ट्रांसफर में 7 से 10 दिन लगते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में इसमें 30 दिन से अधिक का समय लगता है। 13 राज्यों में ऑनलाइन आवेदन के बाद भी आरटीओ (RTO) में भौतिक दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं।
- असमान रोड टैक्स: 6 लाख रुपये की कार पर उत्तर प्रदेश में 3 प्रतिशत रोड टैक्स है। जबकि कर्नाटक में यह 14 प्रतिशत (66,000 रुपये का अंतर) है।
भारत में यूज्ड-कार बाजार का भविष्य और आकार कितना बड़ा है?
- बाजार का आकार: भारत का यूज्ड-कार बाजार 2024-25 में 36.4 अरब डॉलर का था। जिसके 2030 तक बढ़कर 73.5 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
- बिक्री का अनुपात: वर्ष 2030 तक नई और पुरानी कारों की बिक्री का अनुपात 1.3:1 से बढ़कर 1.7:1 हो जाएगा। यानी हर 100 नई कारों पर 170 पुरानी कारें बिकेंगी।
- पहली बार कार खरीदने वाले: पुरानी कार बाजार के 60 से 65 प्रतिशत ग्राहक पहली बार कार खरीदने वाले होते हैं। 2025 में पुरानी कार की औसतन कीमत 5.47 लाख रुपये रही। जबकि नई कार की औसतन कीमत 11.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
इस पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाने की सिफारिश की गई है?
केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों के बीच नीतियों के एकीकरण और सुधार पर काम कर रही है। रिपोर्ट में निम्नलिखित मुख्य समाधान दिए गए हैं:
- मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन: आरसी ट्रांसफर के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए।
- डिजिटल दस्तावेजों की मान्यता: आरटीओ में भौतिक दस्तावेज जमाने कराना खत्म कर डिजीलॉकर (DigiLocker) और एमपरिवहन (mParivahan) के दस्तावेजों को ही प्राथमिक प्रमाण माना जाए।
- स्वचालित नो ऑब्जेक्शन: लोन चुकता होने पर VAHAN पोर्टल और बैंकों के बीच रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर से लोन हाइपोथेकेशन अपने आप हट जाना चाहिए।
- चालान क्लीयरेंस: अधिकृत डीलरों को वाहन ट्रांसफर के दौरान मालिक के बिना ओटीपी के पेंडिंग चालान क्लियर करने की अनुमति दी जानी चाहिए।