भारत जैसे-जैसे अपने इथेनॉल सफर के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, देश में E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल ईंधनों को अपनाने के लिए एक व्यापक खाका तैयार कर लिया गया है। आईआईटी दिल्ली और ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने एक नई श्वेत पत्रिका जारी की है, जिसमें भारत में ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को अपनाने के लिए विस्तृत रोडमैप दिया गया है।
यह व्हाइट पेपर ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अक्तूबर 2026 में 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाली Toyota Innova (टोयोटा इनोवा) के बहुप्रतीक्षित लॉन्च का संकेत दिया है। इस खबर ने देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, जो पेट्रोल और इथेनॉल के किसी भी मिश्रण पर चलने में सक्षम हैं।
IIT दिल्ली के 10-पॉइंट रोडमैप में E85 और E100 के लिए क्या सिफारिशें की गई हैं?
आईआईटी दिल्ली के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. पी. एम. वी. सुब्बाराव और शोधकर्ता सप्तशीष देब द्वारा लिखे गए इस रिपोर्ट को 'AIDA ग्रीन एनर्जी सेमिनार 2026' में पेश किया गया था। यह रिपोर्ट E20 से आगे बढ़ते हुए E85 और E100 ईंधनों के इस्तेमाल के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती है:
- इंजन टिकाऊपन: उच्च इथेनॉल मिश्रण से इंजन को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए FKM/Viton और PTFE सील्स, एडेप्टिव ECU कैलिब्रेशन और हायर-फ्लो फ्यूल इंजेक्टर्स जैसे कंपोनेंट्स के इस्तेमाल की सिफारिश की गई है।
- कीमत तय करने का नया मॉडल: रिपोर्ट में इथेनॉल की कीमत प्रति लीटर के बजाय प्रति किलोमीटर लागत के आधार पर तय करने का सुझाव दिया गया है। चूंकि इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है, इसलिए E85 ईंधन पर पेट्रोल के मुकाबले 25 प्रतिशत तक गतिशील छूट देने का प्रस्ताव है। ताकि उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
दोपहिया वाहन और किसान इस फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति में कैसे महत्वपूर्ण हैं?
व्हाइट पेपर में भारतीय ऑटो बाजार के दो सबसे बड़े घटकों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई गई है:
- टू-व्हीलर सेगमेंट पर जोर: AIDA के अनुसार, भारत में कुल पेट्रोल खपत का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल होता है। दोपहिया वाहनों के लिए अलग इथेनॉल रणनीति अपनाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम की जा सकती है।
- किसानों की आय में बढ़ोतरी: रिपोर्ट में इथेनॉल उत्पादन को केवल गन्ने तक सीमित न रखकर मक्का और कृषि अवशेषों से 2G (सेकंड-जनरेशन) इथेनॉल बनाने की सिफारिश की गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के सफल संचालन के लिए क्या चुनौतियां हैं?
व्हाइट पेपर स्पष्ट करता है कि E85 और E100 जैसे उच्च ईंधनों की सफलता केवल वाहनों की तकनीक पर निर्भर नहीं करेगी। बल्कि इसके लिए पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है:
- फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर: पेट्रोल पंपों पर उच्च इथेनॉल मिश्रण की उपलब्धता और फ्यूल डिस्पेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना होगा।
- सामूहिक प्रयास की जरूरत: ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऊर्जा कंपनियों, बायोफ्यूल उत्पादकों और नीति निर्माताओं के बीच तालमेल जरूरी है। AIDA के अनुसार, जून 2026 में भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार के लॉन्च के बाद अब सिर्फ छिटपुट लॉन्च से काम नहीं चलेगा। बल्कि एक पूरी इकोसिस्टम तैयार करनी होगी।