क्या यह संगठित गिरोह का हिस्सा था?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गतिविधियां पूरी तरह योजनाबद्ध और मुनाफे पर आधारित थीं। उसका तरीका किसी पेशेवर नेटवर्क जैसा था, जिसका मकसद मानवीय भावनाओं का शोषण कर पैसा कमाना था।
रमजान में क्यों बढ़ जाते हैं ऐसे मामले?
दुबई पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान पकड़े गए लगभग 90 प्रतिशत भिखारी विजिट वीजा पर यूएई आए थे। वे जानबूझकर रमजान के महीने को चुनते हैं, जब लोग दान-पुण्य के लिए अधिक उदार होते हैं। कई मामलों में गिरफ्तार भिखारियों के पास हजारों दिरहम नकद मिले।
कितनी नकदी बरामद हुई?
अधिकारियों ने बताया कि एक मामले में भिखारी के पास 25,000 दिरहम (करीब साढ़े 5 लाख रुपये) नकद पाए गए, इसके बावजूद वह सड़कों पर भीख मांग रहा था। इससे यह साफ होता है कि यह मजबूरी नहीं बल्कि ठगी का जरिया था।
भीख मांगने पर क्या है कानून और सजा?
यूएई के फेडरल कानून नंबर 9 (2018) के तहत भीख मांगना अपराध है। इसके लिए तीन महीने तक की जेल और 5,000 दिरहम तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, संगठित भीख मांगने वाले गिरोह या विदेश से लोगों को लाकर इस काम में लगाने वालों को छह महीने की जेल और 1 लाख दिरहम तक का जुर्माना हो सकता है।
नागरिकों से पुलिस की क्या अपील है?
दुबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भिखारियों को पैसे न दें और ऐसे मामलों की सूचना आधिकारिक हेल्पलाइन या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दें। साथ ही, ऑनलाइन दान की अपीलों से भी सतर्क रहने को कहा गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दान केवल लाइसेंस प्राप्त चैरिटी संस्थाओं के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। क्योंकि साइबर ठग रमजान की उदारता का फायदा उठाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं।