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इमोला में हुई यूरोप की पहली ड्राइवरलेस कार रेस: बिना स्टीयरिंग-पैडल के कैसे दौड़ी SF23? जानें पूरी तकनीक

Thu, 10 Sep 2026 10:36 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इटली के फॉर्मूला एक शहर इमोला में ऑटोमोटिव और एआई की दुनिया को लेकर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। A2RL ने पूरी तरह ऑटोनॉमस कारों के लिए यूरोप की पहली मल्टी-कार रेस की सफल मेजबानी की। इसमें बिना स्टीयरिंग व्हील, पैडल या ड्राइवर के 12-लैप की इस रोमांचक दौड़ में जर्मनी, इटली और यूएई की टीमों ने भाग लिया। आइए इस मल्टी-कार रेस कार के बारे में डिटेल में जानते हैं।
 
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यूरोप में हुई पहली मल्टी-कार रेस - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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इटली में पूरी तरह से स्वायत्त कारों के बीच यूरोप की पहली मल्टी-कार रेस आयोजित की गई। अबू धाबी ऑटोनॉमस रेसिंग लीग (A2RL) की पांच टीमों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसमें खास बात रही कि इन रेसिंग कारों में न तो स्टीयरिंग व्हील था, न पैडल और न ही कोई ड्राइवर। इसके बावजूद कारों ने एतिहासिक रेस ट्रैक पर तेज रफ्तार में एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला किया। इस प्रतियोगिता में जर्मनी, इटली और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का प्रतिनिधित्व करने वाली टीमें शामिल थीं। जिसमें 12 लैप की ऑटोनॉमस रेस UAE की काइनेटिज (Kinetiz) टीम जीती।

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कार खुद चलती है, लेकिन पीछे पूरी टीम काम करती है

  • रेस के दौरान भले ही कोई इंसान न बैठा हो, लेकिन इसे प्रतिस्पर्धा बनाने के पीछे बड़ी टीम काम करती है। इंजीनियर और वैज्ञानिक कार के लिए ऐसा एआई सिस्टम और सॉफ्टवेयर तैयार करते हैं, जो रेस के दौरान खुद फैसले ले सके।
  • ASPIRE के सीईटो स्टेफेन टिम्पानो, जो इस इवेंट के पीछे की संस्था है, के मुताबिक टीमें जीतने के इरादे से आती हैं। उनके अनुसार, असली मुकाबला कार के अंदर मौजूद सॉफ्टवेयर और कोड का है। यानी इस रेस में ड्राइवर की जगह एआई सिस्टम कार को चलाता है और इंजीनियरों की क्षमता यह तय करती है कि वह एआई कितनी तेजी और सटीकता से फैसले ले सकता है।


सभी कारों में एक जैसा बेस मॉडल
यह प्रतियोगिता काफी आकर्षक रही, क्योंकि इसमें सभी टीमों को डैलारा SF23 (Dallara) सिंगल-सीटर रेसिंग कार का इस्तेमाल करना पड़ा। यही कार जापान की सुपर फॉर्मूला सीरीज के लिए विकसित की गई है, जिसे फॉर्मूला 1 के बाहर दुनिया की सबसे तेज रेसिंग चैंपियनशिप में से एक माना जाता है। हालांकि इन कारों से इंसानी नियंत्रण हटा दिया गया है। कार को चलाने और आसपास की स्थिति समझने के लिए इसमें कई आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।

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कैमरा, रडार और लिडार से देखती है कार

  • यहां पर एक सवाल आता कि आखिर यह कारे आस-पास की चीजों को समझती कैसे हैं? ताे आपको बता दें यह ऑटोनॉमस रेसिंग कारें अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए कैमरा, रडार और लिडार (LiDAR) सेंसर का इस्तेमाल करती हैं। इन सेंसर से मिलने वाली जानकारी को कार का ऑनबोर्ड कंप्यूटर प्रोसेस करता है।
  • इसके बाद एआई सिस्टम तय करता है कि कार को किस दिशा में जाना है, कितनी रफ्तार रखनी है और दूसरे वाहनों के मुकाबले कैसे प्रतिक्रिया देनी है। यानी जहां सामान्य रेसिंग कार में ड्राइवर कुछ ही सेकंड में इन फैसलों को लेता है, वहीं यहां यह काम सेंसर, कंप्यूटर और एआई  सिस्टम मिलकर करते हैं।

क्या कोई चुनौती भी सामने आई?

  • हालांकि इसकी कुछ चुनौतियां भी हैं। A2RL के स्पोर्टिंग हेड अलेक्जेंडर विंकलर के अनुसार, ऑटोनॉमस ड्राइविंग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है नियंत्रित माहौल में तेज रफ्तार और जोखिम वाली परिस्थितियों का परीक्षण करना।
  • दूसरी कारों के साथ रेसिंग इस चुनौती को और मुश्किल बना देती है। जब कई कारें अलग-अलग या समान गति से एक ही ट्रैक पर दौड़ रही हों, तो AI को लगातार बदलती परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेना पड़ता है।
  • ऐसा डेटा सामान्य सड़क परीक्षणों में हासिल करना मुश्किल होता है। यही वजह है कि रेसिंग ट्रैक को ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक के परीक्षण के लिए अहम माना जा रहा है।


इंसान के लिए भी बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती

  • मोडेना और रेजियो एमिलिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्को बर्तोग्ना ने इसे आज की सबसे कठिन इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक बताया। उनका कहना है कि यह सिर्फ ऑटोनॉमस ड्राइविंग नहीं है, बल्कि कार की हैंडलिंग की सीमा पर ऑटोनॉमस ड्राइविंग है। रेस के दौरान इंजीनियरों को अपना कोड कार के हवाले करना पड़ता है। इसके बाद कार खुद फैसले लेती है।
  • जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) की टीम लीड साशा ब्युट्नर ने इसकी तुलना एक बच्चे को अपना काम करने देने से की। उनके मुताबिक रेस शुरू होने के बाद इंजीनियरों के पास कार को सीधे नियंत्रित करने का विकल्प नहीं होता और AI से गलतियां भी हो सकती हैं।


क्या एआई इंसानी रेस ड्राइवर की बराबरी कर सकता है?

  • ऑटोनॉमस कारें शुद्ध प्रदर्शन के मामले में पेशेवर ड्राइवरों के करीब पहुंच रही हैं, लेकिन आयोजकों का मानना है कि एआई अभी इंसानी रेस ड्राइवर की पूरी क्षमता को दोहरा नहीं सकता।
  • ASPIRE के सीईओ  स्टेफेन टिम्पानो के अनुसार, आज भी एआई कार में इंसानी ड्राइवर की कल्पना और निर्णय क्षमता पूरी तरह नजर नहीं आती। हालांकि समय के साथ इसमें सुधार हो सकता है।
  • उनका मानना है कि एआई और इंसान को एक-दूसरे के विकल्प के बजाय साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। भविष्य में मानव ड्राइवर एआई की मदद से और सुरक्षित तरीके से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

रेसिंग से बढ़ाना चाहते हैं एआई पर भरोसा
A2RL का मकसद सिर्फ तेज कारें बनाना नहीं है। आयोजक चाहते हैं कि आम लोगों को ऑटोनॉमस ड्राइविंग और AI तकनीक को करीब से समझने का मौका मिले। टिम्पानो के मुताबिक एआई को लेकर लोगों में अभी भी कई चिंताएं हैं। इनमें नौकरी, जीवन और एआई की क्षमताओं को लेकर डर शामिल है। ऐसे में परिचित और प्रतिस्पर्धी माहौल यानी मोटरस्पोर्ट में AI को देखने से लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

2023 में हुई थी A2RL की शुरुआत
अबू धाबी ऑटोनॉमस रेसिंग लीग (A2RL) की स्थापना 2023 में हुई थी और इसका मुख्यालय अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात में है। इमोला की यह रेस ऑटोनॉमस रेसिंग के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। यहां एक ही ट्रैक पर कई एआई-संचालित कारों को तेज रफ्तार में प्रतिस्पर्धा करते देखना यह दिखाता है कि स्वायत्त ड्राइविंग तकनीक सिर्फ सड़कों और सामान्य टेस्टिंग तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अब मोटरस्पोर्ट जैसे कठिन वातावरण में भी अपनी क्षमता साबित करने की कोशिश कर रही है।

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