जानिए क्या-क्या होगा इस सर्वे में
इस अध्ययन में करीब 10 प्रमुख पहलू शामिल होंगे। जैसे ट्रैफिक की मात्रा, सड़क की चौड़ाई, जाम वाले इलाकों की मैपिंग और दुर्घटना विश्लेषण। सर्वे से यह भी पता चलेगा कि कौन-से रास्ते और इलाके सबसे ज्यादा ट्रैफिक मांग वाले हैं, कहां बॉटलनेक (जाम पॉइंट) हैं और कौन-से मार्ग इंटरसिटी या इंटरस्टेट कनेक्टिविटी के लिए अहम हैं।
एक "ऑरिजिन-डेस्टिनेशन" स्टडी भी की जाएगी, जिसमें यह समझने की कोशिश होगी कि लोग दिल्ली में कहां से कहां और क्यों यात्रा करते हैं, जैसे काम, पढ़ाई या किसी और कारण से।
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जाम कम करने की नई रणनीति
अधिकारियों ने बताया कि इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि दिल्लीवासी किन इलाकों से किन समयों में निकलते हैं, ताकि आने वाले समय में बस रूट्स और मेट्रो कनेक्टिविटी की बेहतर ढंग से योजना बनाई जा सके।
इसके साथ ही, सड़क डिजाइन और मोड़ों के रेडियस का भी ऑडिट होगा, ताकि यह देखा जा सके कि कहीं खराब लेआउट तो जाम की वजह नहीं बन रहा।
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वाहनों की बाढ़ से परेशान दिल्ली
दिल्ली में फिलहाल 1.4 करोड़ से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हैं और हर दिन लगभग 1,000 नए वाहन जुड़ रहे हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1981 से 2023 के बीच वाहनों की संख्या 21 गुना बढ़ी, जबकि सड़क की लंबाई सिर्फ दोगुनी हुई। जो कि 15,487 किलोमीटर से बढ़कर 33,198 किलोमीटर हुई।
दिल्ली में 93 प्रतिशत वाहन निजी कारें और दोपहिया हैं, जो ट्रैफिक का सबसे बड़ा कारण हैं।
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पार्किंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी फोकस
सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि सड़क पर अवैध पार्किंग किस तरह से ट्रैफिक जाम बढ़ा रही है। इसके अलावा, मेट्रो, बस, ऑटो और पैदल यात्रियों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। रिपोर्ट में बस स्टॉप, फुटपाथ, साइन बोर्ड और यात्री सूचना प्रणाली को अपग्रेड करने की सिफारिशें शामिल होंगी।
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सड़क सुरक्षा भी होगी अहम हिस्सा
दिल्ली पुलिस और सड़क सुरक्षा सेल के डेटा से एक्सीडेंट-प्रोन ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की जाएगी। ताकि सड़क सुरक्षा और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए ठोस योजना बनाई जा सके।
क्यों जरूरी है यह सर्वे
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में अब तक ताजा और सटीक ट्रैफिक डेटा की कमी के कारण सही योजना बनाना मुश्किल रहा है। सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के ट्रैफिक इंजीनियरिंग प्रमुख एस. वेलमुरुगन का कहना है, "दिल्ली को ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए एक व्यापक और वैज्ञानिक सर्वे की बहुत जरूरत है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि किन जगहों पर कम खर्च में सबसे ज्यादा सुधार किए जा सकते हैं।"
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अब डेटा से बनेगी दिल्ली की ट्रैफिक नीति
यह नया ट्रैफिक सर्वे राजधानी के लिए एक "रोडमैप टू स्मार्ट मोबिलिटी" साबित हो सकता है। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी वैज्ञानिक आधार पर सुधारने का रास्ता खुलेगा।
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