दिल्ली सरकार द्वारा 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भरवाने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आई है। एक ताजा सर्वे के अनुसार, राजधानी में 44 फीसदी वाहन मालिक इस फैसले के खिलाफ हैं। यह सर्वे LocalCircles नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा किया गया है, जिसमें 11 जिलों से 25,000 से ज्यादा प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गई हैं।
1 जुलाई से लागू होगा नियम
दिल्ली सरकार ने यह नियम 1 जुलाई 2025 से लागू करने का ऐलान किया है। इसके तहत 10 साल पूरा कर चुकीं पेट्रोल और 15 साल पूरा कर चुकीं डीजल गाड़ियों को फ्यूल नहीं दिया जाएगा। इस फैसले को Commission for Air Quality Management (CAQM) का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि, यह घोषणा सामने आने के बाद राजधानी के वाहन मालिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
क्या कहते हैं लोग
LocalCircles द्वारा किए गए सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि क्या वे इस फैसले का समर्थन करते हैं, तो 12,795 में से 49% ने 'हां' कहा जबकि 44% लोगों ने साफ तौर पर इसका विरोध किया। वहीं 7% लोग इस मुद्दे पर स्पष्ट राय नहीं दे सके।
कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी गाड़ी को अच्छी हालत में रखा है, माइलेज भी कम है, ऐसे में सिर्फ उम्र के आधार पर उस पर प्रतिबंध लगाना अनुचित है। खासतौर पर डीजल गाड़ी मालिकों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया है क्योंकि उन्होंने 15 साल की रजिस्ट्रेशन फीस पहले ही जमा की हुई है।
क्या करेंगे वाहन मालिक
सर्वे में यह भी पूछा गया कि जिनकी गाड़ियां इस नियम के दायरे में आती हैं, वे अब क्या करेंगे? इसके जवाब में 62% लोगों ने कहा कि वे अपनी गाड़ी दूसरे राज्य में बेच देंगे या सेकंड हैंड कार डीलर को सौंप देंगे। वहीं 16% लोगों ने कहा कि वे एनसीआर के दूसरे शहरों से पेट्रोल-डीजल खरीदेंगे। कुछ (6%) लोग ऐसे भी हैं जो किसी दूसरी गाड़ी से पेट्रोल-डीजल खरीदकर पुरानी गाड़ी में ट्रांसफर करने की योजना बना रहे हैं।
NCR में भी बढ़ेगा असर
यह नियम फिलहाल दिल्ली में 1 जुलाई से लागू होगा, लेकिन इसके विस्तार की योजना भी बनाई जा रही है। 1 नवंबर 2025 से यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत में भी लागू किया जा सकता है। ऐसे में पूरे एनसीआर में लाखों वाहन मालिक प्रभावित हो सकते हैं।
दिल्ली सरकार के इस कदम का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है, लेकिन इसके विरोध में भी बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। वाहन मालिकों का मानना है कि एक ही नियम से सभी गाड़ियों को तौलना उचित नहीं है, खासतौर पर तब जब गाड़ी अच्छी हालत में हो। अब देखना होगा कि सरकार इस जनविरोध को देखते हुए अपने फैसले पर कोई बदलाव करती है या नहीं।