केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को जड़ से मिटाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी फेज-आउट प्लान तैयार कर रही है। इस योजना के तहत न केवल बीएस-III और उससे पुराने वाहनों को हटाया जाएगा, बल्कि अगले 5 वर्षों में बीएस-IV (BS-IV) वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का लक्ष्य है। जैसे की अधिक प्रदूषण फैलाने वाले भारी ट्रकों और पुराने डीजल ऑटो पर हैं। इससे क्षेत्र में केवल बीएस-IV और ईवी का ही संचालन किया जा सके।
केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत पुराने ट्रकों और मालवाहक वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने की योजना बना रही है। इन्हें पहले से ज्यादा साफ बीएस-IV मानक वाले वाहनों से बदला जाएगा। यह घोषणा आगामी बजट का हिस्सा बनने की उम्मीद है। इसे वायु प्रदूषण नियंत्रण की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सीएक्यूएम के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में कुल 2.88 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 93 प्रतिशत हल्के मोटर वाहन (कार और दोपहिया) हैं। इनमें से करीब 37 प्रतिशत वाहन बीएस-III या उससे पुराने हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, पुराने डीजल ऑटो-रिक्शा को 2026 तक पूरे एनसीआर से चरणबद्ध लेकिन समयबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। खासतौर पर सर्दियों में, जब मौसम प्रदूषकों के फैलाव को रोकता है, तब इन वाहनों पर सख्ती और बढ़ाई जा सकती है।
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बीएस-IV वाहन फिटनेस टेस्ट पास करते हैं, तो उन्हें सीमित अवधि के लिए रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, लंबे समय के बाद इस योजना के तहत अगले 5 वर्षों में बीएस-IV वाहनों को भी धीरे-धीरे हटाने की तैयारी है, ताकि एनसीआर में केवल बीएस-VI, इलेक्ट्रिक और क्लीन फ्यूल आधारित वाहनों का दबदबा रहे।
क्या जरूरी है ये योजना?
एक्सपर्ट्स मानते है कि योजना दिल्ली-एनसीआर की बदहाल वायु गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में एक निर्णायक और संरचनात्मक सुधार मानी जा रही है। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो ये न केवल प्रदूषण कम करेगी बल्कि देश के अन्य प्रदूषित शहरी क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।