निजी वाहनों पर क्या हैं पाबंदियां
ग्रैप स्टेज-4 के तहत निजी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं है, लेकिन अनुमति वाहन के उत्सर्जन मानकों और ईंधन के प्रकार पर निर्भर करती है। जो पेट्रोल और डीजल कारें निर्धारित मानकों को पूरा करती हैं, उन्हें चलने की इजाजत है। हालांकि पुराने वाहनों पर सबसे कड़ी पाबंदी लगाई गई है। इस चरण के दौरान BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलाने की अनुमति नहीं है। जब तक कि वे किसी आवश्यक सेवा से जुड़े न हों।
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किन वाहनों को मिली छूट
स्वच्छ ईंधन पर चलने वाले वाहनों को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। इलेक्ट्रिक कारें, सीएनजी वाहन और BS-VI मानकों वाले वाहन बिना किसी अतिरिक्त रोक-टोक के सड़कों पर चल सकते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन, टैक्सी और एप-आधारित कैब सेवाओं को भी संचालन की अनुमति है, बशर्ते वे उत्सर्जन नियमों का पालन करें। पड़ोसी एनसीआर क्षेत्रों से दिल्ली में प्रवेश भी तब तक संभव है, जब तक वाहन प्रतिबंधित BS श्रेणी में नहीं आता।
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ट्रकों के लिए सख्त नियम
ग्रैप स्टेज-4 के दौरान ट्रकों की आवाजाही पर विशेष सख्ती बरती जा रही है। BS-IV डीजल ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। हालांकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति या जरूरी सेवाओं में लगे ट्रकों को इससे छूट मिल सकती है। सीएनजी, एलएनजी, इलेक्ट्रिक और BS-VI डीजल ट्रकों को दिल्ली में आने-जाने की अनुमति है। इसके अलावा दिल्ली में पंजीकृत ऐसे भारी मालवाहक वाहन, जो BS-IV डीजल या उससे पुराने हैं, उन्हें भी जरूरी सेवाओं को छोड़कर सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं होगी।
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चालान और सख्त निगरानी
ग्रैप स्टेज-4 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियम तोड़ने वालों पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। और गैर-अनुपालन वाले वाहनों को जब्त करने का अधिकार भी प्रशासन के पास है। जिन वाहनों के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें 10,000 रुपये तक का चालान भरना पड़ सकता है। दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग ने सड़कों पर निगरानी बढ़ा दी है, जहां फिजिकल चेकिंग के साथ-साथ डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
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