स्वचालित बस बे आवंटन प्रणाली
अब कश्मीरी गेट ISBT पर स्वचालित बस बे आवंटन प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे बसों की आवाजाही को बेहतर बनाया जा सके। इस नई प्रणाली के तहत:
- भीड़भाड़ कम होगी, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
- स्पेस का बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बसों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा।
- यात्रियों को रियल-टाइम जानकारी मिलेगी, जिससे उन्हें बसों की सही जानकारी समय पर मिल सकेगी।
इसके अलावा, FASTag (फास्टैग) आधारित एंट्री/एग्जिट सिस्टम भी लागू किया जाएगा। जिससे बसों की आवाजाही और अधिक आसान होगी और ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधरेगा।
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नई तकनीक के लिए योजना और क्रियान्वयन
इस तकनीकी बदलाव को लागू करने के लिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (DTIDC) ने डिजाइन, आपूर्ति, इंस्टॉलेशन और रखरखाव के लिए एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरपीएफ) जारी किया है।
टेंडर के मुताबिक, इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। और यह 60 बस बे कवर करेगा, जिसमें 25 प्रतिशत विस्तार की गुंजाइश होगी। इस सिस्टम की जिम्मेदारी एक चयनित कंपनी को दी जाएगी, जो इसे डिजाइन, डेवेलप, लागू और 5 साल तक इसका रखरखाव करेगी। साथ ही, अच्छे प्रदर्शन के आधार पर इसे 3 साल के लिए बढ़ाने का विकल्प भी दिया जाएगा।
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यात्रियों और बस क्रू के लिए नई सुविधाएं
इस डिजिटल अपग्रेड के तहत कई नई सुविधाएं दी जाएंगी:
- बस बे पर डिजिटल डिस्प्ले लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को बसों की सही स्थिति की जानकारी मिलेगी।
- यात्रियों को बसों का अनुमानित वेटिंग टाइम पता चलेगा, जिससे वे अपनी यात्रा को बेहतर प्लान कर सकेंगे।
- बस क्रू के लिए एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे, जिससे बस संचालन अधिक सुगम होगा।
- लाइव बस ट्रैकिंग के लिए मोबाइल एप और वेब पोर्टल उपलब्ध होगा, जिससे यात्रियों को सटीक जानकारी मिलेगी।
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यात्रा समय में होगी कमी
इस समय, इंटर-स्टेट बसों को टर्नअराउंड (ISBT में आने और जाने में) 45-60 मिनट लगते हैं, जिससे अंदर और बाहर भीड़भाड़ बनी रहती है। पिछले साल निरीक्षण के दौरान, दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अधिकारियों को इसे 30 मिनट तक कम करने का निर्देश दिया था, जिससे बसों का संचालन 50 प्रतिशत ज्यादा हो सकेगा।
यह नई डिजिटल प्रणाली इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे दिल्ली के सबसे व्यस्त बस टर्मिनल को अधिक आधुनिक, सुव्यवस्थित और यात्री-अनुकूल बनाया जा सकेगा।
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