: पॉलिसी के अनुसार एक अप्रैल 2028 के बाद दिल्ली में नए पेट्रोल और डीजल टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। यानी उस तारीख के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही खरीदे जा सकेंगे। वहीं 2027 से नए थ्री-व्हीलर भी केवल इलेक्ट्रिक ही होंगे, जिसमें डिलीवरी और एग्रीगेटर फ्लीट भी शामिल हैं। इस पॉलिसी की खबर सुनते ही जहां एक ओर ओला और एथर जैसी कंपनियां खुश हैं, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक ऑटोमेकर्स का मानना है कि बुनियादी ढांचा तैयार हुए बिना ऐसा करना ग्राहकों और कंपनियों दोनों के साथ अन्याय होगा।
कंपनियों का क्या कहना है?
कंपनियों का तर्क है कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल्स अभी भी अपने शुरुआते दौर में है। खासकर हाई-परफॉर्मेंस और लंबी रेंज वाली बाइक्स। इनमें ईवी में विकल्प तो हैं, लेकिन या तो वो महंगे या फिर बाजार में मौजूद नहीं है। ऐसे में सिर्फ कुछ साल यानी 2028 तक पेट्रोल टू- व्हीलर्स को पूरी तरह बंद करना ग्राहकों से उनकी पसंद को छीनना जैसा हो सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना किसकी जिम्मेदारी?
इसके अलावा पॉलिसी का एक प्रावधान कहता है कि हर डीलर को अपने पास कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा। कंपनियों का तर्क है कि इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। मैन्युफैक्चरर्स पर यह बोझ डालने से गाड़ियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। जिसका असर ग्राहकों के जेब पर पड़ेगा।
वहीं, ऑटो इंडस्ट्री लंबे समय से हाइब्रिड गाड़ियों को ब्रिज टेक्नोलॉजी में देखने की मांग कर रही हैं, लेकिन दिल्ली की नई पॉलिसी केवल सिर्फ ईवी पर ही फोकस कर रही है। ऐसे में कंपनियों का मानना है कि अचानक स्विच करने के बजाय हाइब्रिड एक बेहतर विकल्प हो सकता है। जहां एक तरफ सरकार 30 लाख रुपये तक ही इलेक्ट्रिक कारों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने का लालच दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल गाड़ियों पर बैन की तैयारी भी हो सकती है। इंडस्ट्री इसे कैरेट एंड स्टिक यानी की लालच और सजा की नीति कह रही है।
किसको क्या होगा असर?
ऑटो कंपनियाें के अनुसार इससे बजाज, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस और होंडा जैसी गाड़ियां, जो सिर्फ अभी भी ICE (पेट्रोल) इंजन पर निर्भर हैं, उनके लिए समस्या हो सकती है। वहीं, ईवी कंपनियां जैसे ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और कार सेगमेंट में टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां जो पहले ही ईवी में नाम बना चुकी हैं, उनके लिए यह पॉलिसी काफी मददगार साबित हो सकती है।