दिल्ली सरकार जल्द ही ईवी पॉलिसी 2.0 लागू करने की तैयारी में है, जिसे केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क का तेज विस्तार, ज्यादा सब्सिडी और 2028 तक हजारों इलेक्ट्रिक बसों का सड़क पर लाना है।
अब सब्सिडी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। शोरूम पर आधार के जरिए तुरंत वेरिफिकेशन हो जाएगा, लेकिन इसमें कुछ शर्तें भी लागू हैं। जैसे वाहन रजिस्टर्ड होना चाहिए। दोपहिया की एक्स-फैक्टरी कीमत 1.5 लाख से कम हो और एल 5 तिपहिया पांच लाख रुपये सीमा के भीतर हो।
हालांकि दिल्ली सरकार पहले से ई-दोपहिया पर 5,000 रुपये प्रति kWh (अधिकतम 30,000 रुपये), ई-तिपहिया पर 30 हजार रुपये फ्लैट सब्सिडी दे रही है। दोनों योजनाओं के संयोजन से खरीदारों को अधिक वित्तीय राहत मिल सकती है।
बस फ्लीट का पूर्ण विद्युतीकरण
ईवी पॉलिसी 2.0 का केंद्रीय उद्देश्य दिल्ली की पूरी सार्वजनिक बस सेवा को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करना है। तय रोडमैप के अनुसार 31 मार्च 2026 तक 6,000 ई-बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी। इसके बाद अगले साल ये संख्या बढ़ाकर 7,500 की जाएगी। योजना के तीसरे चरण में 31 मार्च 2028 तक कुल 10,400 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रखा गया है, और अंत में इसे बढ़ाकर 14,000 ई-बसों तक पहुंचाने की तैयारी है।
ये परिवर्तन केवल फ्लीट विस्तार नहीं है, बल्कि शहरी परिवहन ढांचे में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन देती हैं, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके साथ ही परिचालन लागत में लंबे समय तक बचत की भी उम्मीद है। कम शोर प्रदूषण और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसे लाभ भी मिलेंगे। इस तरह ईवी पॉलिसी 2.0 दिल्ली को स्वच्छ, सतत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने की रणनीतिक पहल मानी जा रही है।
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स्क्रैपिंग और बैटरी प्रबंधन
नई ईवी पॉलिसी 2.0 में सिर्फ नए इलेक्ट्रिक वाहन बेचने पर ही जोर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को टिकाऊ बनाने की योजना शामिल है। इसके तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे लोग पुराने वाहन छोड़कर नए ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग के लिए अलग तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
नीति में ये भी सुनिश्चित करने की तैयारी है कि बाजार में पर्याप्त संख्या में ईवी उपलब्ध हों, ताकि मांग और आपूर्ति में असंतुलन न हो। बैटरियों के सेकेंड-लाइफ उपयोग जैसे ऊर्जा भंडारण (energy storage) में दोबारा इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी।