₹20,000 का चालान या वापसी
नए निर्देशों को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें राजधानी के प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात कर दी गई हैं। कालिंदी कुंज, चिल्ला बॉर्डर, गाजीपुर और डीएनडी फ्लाईवे जैसे प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की गहन जांच की जा रही है। यहां वाहन के रजिस्ट्रेशन, उत्सर्जन मानक और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसीसी की पड़ताल की जा रही है।
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जांच के दौरान खासतौर पर उन वाहनों को रोका जा रहा है, जो दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं और बीएस6 मानकों पर खरे नहीं उतरते। ऐसे वाहनों के मालिकों को स्पष्ट विकल्प दिया जा रहा है, या तो 20,000 रुपये का चालान भरें या फिर वहीं से यू-टर्न लेकर वापस लौट जाएं। अधिकारियों का कहना है कि नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
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पुराने डीजल और पेट्रोल वाहन भी रडार पर
इस सख्ती का दायरा सिर्फ गैर-बीएस6 वाहनों तक सीमित नहीं है। 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन भी जांच के दायरे में हैं, खासकर वे वाहन जो BS-III या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों पर चलते हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया स्पष्टीकरण के बाद उठाया गया है, जिसमें अगस्त 12 के पुराने आदेश में संशोधन कर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव का असर पड़ोसी शहरों से दिल्ली आने वाले बड़ी संख्या में वाहनों पर पड़ा है। अनुमान है कि गुरुग्राम में करीब दो लाख, नोएडा में चार लाख और गाजियाबाद में लगभग साढ़े पांच लाख वाहन ऐसे हैं, जो नए मानकों के तहत प्रभावित हो सकते हैं।
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पेट्रोल पंपों पर भी लागू हुआ 'नो फ्यूल' नियम
बॉर्डर चेकिंग के अलावा दिल्ली के भीतर भी निगरानी तेज कर दी गई है। राजधानी के पेट्रोल पंपों पर अब उन वाहनों को ईंधन नहीं दिया जा रहा है, जिनके पास वैध पीयूसीसी नहीं है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शहर के भीतर चलने वाले वाहन भी प्रदूषण मानकों का पालन करें।
प्रशासन का मानना है कि बॉर्डर पर रोक और शहर के अंदर ईंधन के लिए मना करना जैसे कदम, मिलकर प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण में मदद करेंगे। अगर वायु गुणवत्ता में सुधार के संकेत नहीं मिले, तो आने वाले दिनों में यह सख्ती और बढ़ सकती है।
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