बिना ट्रांसफर के बार-बार बिकती रही कार
यह i20 (रजिस्ट्रेशन नंबर: HR26CE7674) 2013 में बनी थी। 2014 में इसका दूसरा मालिक बना सलमान, जो गुरुग्राम का रहने वाला है। इसके बाद कार दिल्ली के ओखला निवासी देवेंद्र को बेची गई, फिर अंबाला के एक व्यक्ति को, और फिर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आमिर के नाम पहुंच गई।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आखिरकार यह कार डॉ. उमर मोहम्मद के पास पहुंची, जिसे अब आत्मघाती हमलावर माना जा रहा है। इन तमाम खरीद-फरोख्त के बावजूद, किसी ने भी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं करवाया। नतीजा यह हुआ कि आज जब जांच शुरू हुई, तो कानूनी जिम्मेदारी पहले मालिक सलमान पर आ गई। क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में वही असली मालिक है।
यह भी पढ़ें - OICA: शैलेश चंद्रा बने ग्लोबल ऑटो बॉडी के अध्यक्ष, भारत के लिए गौरव का पल, पहली बार किसी भारतीय को मिला यह पद
भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही करें गाड़ी की बिक्री
जांच में सामने आया कि यह कार ब्लास्ट से सिर्फ 4 दिन पहले फरीदाबाद में एक डीलर 'रॉयल कार जोन' के सोनू नामक व्यक्ति ने बेची थी। डीलर ने नई ओनरशिप ट्रांसफर करवाने की प्रक्रिया को टाल दिया, ताकि खर्चा बचाया जा सके। पर इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आखिरी खरीदार तो फरार है, और पिछला मालिक अब संदिग्धों की लिस्ट में है।
इसलिए सलाह दी जाती है कि हमेशा किसी भरोसेमंद कार बिक्री प्लेटफॉर्म के जरिए ही अपनी कार बेचें, जहां ओनरशिप ट्रांसफर की गारंटी और कानूनी जांच सुनिश्चित होती है।
यह भी पढ़ें - GRAP-3: दिल्ली में लागू हुआ ग्रेप-3,जानें कौन सी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के चलाने पर लगा प्रतिबंध
गाड़ी बेचने से पहले दस्तावेज करें तैयार
कार बेचने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहद जरूरी है। जैसे कि RC बुक, इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, सर्विस हिस्ट्री और टैक्स रिसीट्स। अगर आपके पास ये सब कागजात तैयार हैं, तो ट्रांसफर प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाती है। दूसरी ओर, अगर आप कोई सेकंड-हैंड कार खरीद रहे हैं, तो पहले उसकी ओनरशिप हिस्ट्री जरूर जांचें, ताकि बाद में कोई कानूनी समस्या न हो।
यह भी पढ़ें - Two-Wheeler Sales: अक्तूबर 2025 में टू-व्हीलर की रिकॉर्ड बिक्री, जानें किसकी रही कितनी हिस्सेदारी
इंश्योरेंस और RTO ट्रांसफर करना न भूलें
गाड़ी बेचते वक्त सिर्फ आरसी ट्रांसफर ही नहीं, बल्कि इंश्योरेंस ट्रांसफर भी बेहद जरूरी है। अगर इंश्योरेंस नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर नहीं किया गया, तो किसी भी हादसे की जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ सकती है। साथ ही, बिक्री से पहले कोई लंबित चालान, लोन या टैक्स बकाया हो तो उसे चुका दें, ताकि ओनरशिप ट्रांसफर में देरी न हो।
यह भी पढ़ें - Delhi Traffic: दिल्ली की ट्रैफिक जाम की पहेली सुलझाने की तैयारी, जल्द शुरू होगा नया सर्वे, जानें डिटेल्स
आरटीओ में जरूरी फॉर्म भरें
गाड़ी का ट्रांसफर पूरा करने के लिए फॉर्म 28, 29 और 30 भरकर आरटीओ दफ्तर में जमा करें।
- फॉर्म 28: NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के लिए
- फॉर्म 29 और 30: ओनरशिप ट्रांसफर के लिए
इनकी रसीद और कॉपी अपने पास रखें, क्योंकि भविष्य में किसी कानूनी विवाद के समय यही आपके सबूत बनेंगे।
यह भी पढ़ें - Road Safety: गुरुग्राम में ट्रैफिक का नया डिजिटल समाधान, गूगल मैप्स और पुलिस ने लॉन्च किया हाई-टेक नेविगेशन अलर्ट सिस्टम
एक छोटी लापरवाही, बड़ी मुसीबत
दिल्ली ब्लास्ट केस ने साफ कर दिया है कि पुरानी गाड़ी बेचते वक्त लापरवाही भारी पड़ सकती है। किसी हादसे, अपराध या विवाद में अगर गाड़ी शामिल पाई गई और रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हुआ, तो कानूनी रूप से जिम्मेदार पुराना मालिक ही होगा। इसलिए अगली बार जब आप अपनी कार बेचें, तो सुनिश्चित करें कि ओनरशिप ट्रांसफर कानूनी तरीके से पूरा हो, ताकि आपकी सुरक्षा बनी रहे।
यह भी पढ़ें - Nitin Gadkari: IRC में बोले नितिन गडकरी- नए प्रयोगों से ही बनेगा नया भारत, नई तकनीक पर करें काम