क्या होगा नए नियम के तहत?
अब चेन्नई में कार खरीदने वाले हर व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उनके पास सड़क से बाहर (ऑफ-स्ट्रीट) पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। यह पार्किंग घर के भीतर या निजी संपत्ति में होनी चाहिए।
CUMTA के सदस्य सचिव आई. जयकुमार ने बताया, "अक्सर लोग एक से अधिक कारें खरीद लेते हैं, लेकिन पार्किंग स्पेस की कमी के कारण उन्हें सड़क पर खड़ा करना पड़ता है। जिससे पूरे इलाके में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ती है।"
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पहले से मौजूद कारों के लिए नई व्यवस्था
जिन लोगों की कारें पहले से बिना ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग के हैं, उनके लिए CUMTA एक रेजिडेंशियल पार्किंग परमिट सिस्टम शुरू करने की योजना बना रही है। यह परमिट लॉटरी सिस्टम के जरिए उन इलाकों में दिए जाएंगे जहां चौड़ी सड़कें और निरंतर घर बने हुए हैं। जिन घरों में पहले से ही पार्किंग की सुविधा है, वे इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। परमिट हासिल करने वाले लोग मासिक या वार्षिक आधार पर तय पार्किंग स्पॉट किराए पर दे सकते हैं।
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साझा पार्किंग को भी मिलेगा बढ़ावा
CUMTA ने तमिलनाडु कंबाइंड डेवलपमेंट बिल्डिंग रूल्स, 2019 में संशोधन की सिफारिश की है, ताकि निजी इमारतों, गेटेड कम्युनिटीज और मॉल में साझा पार्किंग को अनिवार्य किया जा सके। इससे सार्वजनिक पार्किंग की उपलब्धता बढ़ेगी, और लोग साप्ताहिक या मासिक किराए पर पार्किंग स्पेस का इस्तेमाल कर सकेंगे।
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इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य
बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों को ध्यान में रखते हुए, नई नीति में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत नियमों में संशोधन कर सार्वजनिक और निजी ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग में कम से कम 20 प्रतिशत स्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों के लिए आरक्षित किया जाएगा।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट में होगा सुधार
नीति में एक पार्किंग-डेवलपमेंट शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। यह शुल्क उन निजी पार्किंग स्थलों पर लगाया जाएगा, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन, पैदल यात्रियों के लिए बेहतर रास्ते और साइक्लिंग सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
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चेन्नई में पार्किंग की गंभीर समस्या
फिलहाल चेन्नई में पार्किंग की भारी कमी है। शहर में सिर्फ 14,000 सार्वजनिक पार्किंग स्लॉट उपलब्ध हैं, जबकि 30 लाख से अधिक वाहनों की पार्किंग की जरूरत है। इसके अलावा प्राधिकरण ने चार्जिंग सुविधाओं की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई नीति ट्रैफिक समस्या को हल करने में एक अहम कदम साबित होगी।