शिकायत के अनुसार, नीनू ससीन्द्रन ने अक्तूबर 2021 में अग्रिम राशि का भुगतान कर Ola S1 (ओला एस1) इलेक्ट्रिक स्कूटर बुक किया था। 17 मार्च 2022 को ओला इलेक्ट्रिक ने उन्हें ईमेल के जरिए बताया कि भुगतान विंडो खुली है, लेकिन ओला एस1 मॉडल बंद कर दिया गया है। उन्हें अपग्रेडेड ओला एस1 प्रो की पेशकश की गई, जो उनके बजट में थी। इसके बाद उन्होंने बुकिंग राशि सहित 1,15,332 रुपये का पूरा भुगतान किया।
यह भी पढ़ें - Ola Electric: बढ़ रही हैं ओला इलेक्ट्रिक की मुश्किलें, सरकार ने प्रमाणन एजेंसी से शिकायतों की जांच करने को कहा
ऑर्डर कंफर्मेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन समेत सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद कंपनी ने डिलीवरी की अनुमानित तारीख बताई। इसके आधार पर नीनू ससींद्रन ने अपना मौजूदा पेट्रोल स्कूटर बेच दिया। कई बार फॉलो-अप करने के बावजूद स्कूटर डिलीवर नहीं हुआ। 12 मई, 2022 को नीनू ससींद्रन के पति को ओला से होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया, जिसमें डिलीवरी के लिए अतिरिक्त 30,000 रुपये की मांग की गई।
फोन करने वाले पर उन्हें कुछ संदेह हुआ और उन्होंने कॉल काट दिया। जिसके बाद उन्होंने ओला के ग्राहक सहायता से संपर्क किया। उन्हें आश्चर्य हुआ कि कंपनी ने भी वही बात कही कि जब तक तक अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता, तब तक कोई डिलीवरी नहीं की जाएगी।
ओला के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट, शिकायतकर्ता ने आयोग से संपर्क किया। उन्होंने वाहन की डिलीवरी और कंपनी की सेवा विफलता और अनुचित व्यापार प्रथाओं के कारण हुए मानसिक तनाव और वित्तीय नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की।
ओला इलेक्ट्रिक ने तर्क दिया कि उनकी वेबसाइट पर तकनीकी समस्या के कारण देय राशि 1,45,692 रुपये के बजाय 1,15,332 रुपये गलत तरीके से प्रदर्शित हुई थी। त्रुटि का पता चलने के बाद, कंपनी ने ससीन्द्रन को शेष 30,360 रुपये देने के बारे में सूचित किया। इसके बावजूद, उन्होंने शेष राशि का भुगतान करने या पूरी धनवापसी के लिए ऑर्डर रद्द करने से इनकार कर दिया।
आयोग ने फैसला सुनाया कि ओला का तर्क अस्वीकार्य है। और कंपनी को डिलीवरी न होने के लिए नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 1,15,332 रुपये वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, देरी और गलतफहमी के कारण हुई मानसिक पीड़ा, भावनात्मक संकट और वित्तीय कठिनाई के लिए 25,000 रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए। साथ ही कार्यवाही की लागत के रूप में 10,000 रुपये दिए गए। कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया।