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Automatic Transmission: ये हैं ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन को नुकसान पहुंचाने वाली आम आदतें, समय रहते सुधार लीजिए

Tue, 16 Dec 2025 05:47 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ड्राइविंग को ज्यादा स्मूथ और कम तनावपूर्ण बनाते हैं। लेकिन वे आपकी कार के सबसे सेंसिटिव सिस्टम में से भी एक हैं। ड्राइविंग में लापरवाही इन पर भारी पड़ती हैं।
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Car Automatic Gear - फोटो : Freepik
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विस्तार
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ट्रैफिक जाम से जूझ रही सड़कों में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन कार चलाना आसान और आरामदायक जरूर बनाता है। लेकिन यह सिस्टम बेहद संवेदनशील भी होता है। थोड़ी सी लापरवाही या गलत ड्राइविंग आदतें लंबे समय में गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। जिससे यह महंगे रिपेयरिंग के खर्च का कारण बन सकती हैं। कई बार ड्राइवर अनजाने में ऐसी गलतियां करते रहते हैं, जो धीरे-धीरे ट्रांसमिशन की उम्र कम कर देती हैं।
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ओवरहीटिंग के संकेतों को नजरअंदाज करना
ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन आमतौर पर 93 से 95 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर बेहतर तरीके से काम करता है। जैसे ही तापमान इससे ऊपर जाता है, अंदरूनी हिस्सों को नुकसान शुरू हो जाता है। हर 10 डिग्री सेल्सियस अतिरिक्त तापमान ट्रांसमिशन की उम्र को लगभग आधा कर देता है।

अत्यधिक गर्मी में ट्रांसमिशन फ्लूड अपनी चिकनाई खो देता है और चिपचिपी परत बन जाती है। जो गियर और बेयरिंग्स को नुकसान पहुंचाती है। तेज गर्मी में लंबे समय तक हाई-स्पीड ड्राइविंग और फ्लूड लीक जैसी समस्याएं ओवरहीटिंग का बड़ा कारण बनती हैं।

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कम ट्रांसमिशन फ्लूड पर गाड़ी चलाना
ट्रांसमिशन फ्लूड सिस्टम के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखने और चिकनाई देने का काम करता है। फ्लूड का स्तर कम होने पर ये पार्ट्स आपस में रगड़ खाने लगते हैं। जिससे गर्मी बढ़ती है और गंभीर मैकेनिकल खामी का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए समय-समय पर फ्लूड लेवल की जांच करना और कंपनी की सिफारिश के अनुसार उसे भरवाना जरूरी है।

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फ्लूड बदलने में लापरवाही
समय के साथ ट्रांसमिशन फ्लूड अपनी क्षमता खो देता है और गर्मी व घर्षण से सही तरीके से सुरक्षा नहीं कर पाता। पुराना फ्लूड सील और गैस्केट को नुकसान पहुंचा सकता है, गियर शिफ्टिंग में देरी या स्लिपिंग की समस्या पैदा कर सकता है और अंदरूनी घिसावट को बढ़ा देता है। आमतौर पर 40,000 से 60,000 किलोमीटर के बीच फ्लूड बदलने की सलाह दी जाती है। हालांकि सही अंतराल आपकी कार के मैनुअल में दिया होता है।

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गलत फ्लूड का इस्तेमाल
हर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन एक खास तरह के फ्लूड के लिए डिजाइन किया जाता है। गलत या अलग-अलग फ्लूड को मिलाकर इस्तेमाल करने से सील और क्लच को नुकसान पहुंच सकता है। जिससे गियर शिफ्टिंग अनियमित हो जाती है या पूरा सिस्टम फेल भी हो सकता है। फ्लूड बदलने से पहले मालिकाना मैनुअल देखना बेहद जरूरी है।

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हर सिग्नल पर तेज रफ्तार पकड़ना
बार-बार तेज एक्सीलरेशन या अचानक स्पीड बढ़ाने से टॉर्क कन्वर्टर में काफी ज्यादा गर्मी पैदा होती है। अगर यह आदत लगातार बनी रहे, तो ट्रांसमिशन का तापमान उसकी सीमा से बाहर चला जाता है और अंदरूनी हिस्से जल्दी खराब होने लगते हैं। जब तक आपकी कार खास परफॉर्मेंस ड्राइविंग के लिए नहीं बनी है। तब तक ऐसी आक्रामक ड्राइविंग से बचना ही बेहतर होता है।

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बिना रुके गियर बदलना
गाड़ी को पूरी तरह रोके बिना रिवर्स से ड्राइव या ड्राइव से रिवर्स में शिफ्ट करना ट्रांसमिशन पर जबरदस्त दबाव डालता है। यह सिस्टम गाड़ी की चलती हुई गति को झेलने के लिए नहीं बनाया गया है। लंबे समय तक ऐसा करने से क्लच, बैंड और गियरसेट समय से पहले घिस जाते हैं।

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पार्किंग ब्रेक का इस्तेमाल न करना
कई ड्राइवर कार को सीधे 'पार्क' मोड में डाल देते हैं और हैंडब्रेक नहीं लगाते। इससे ट्रांसमिशन के अंदर मौजूद छोटे से 'पार्किंग पॉल' पर पूरा वजन आ जाता है। हल्की सी टक्कर या ढलान पर खड़ी कार में यह पॉल टूट भी सकता है। सही तरीका यह है कि पहले पार्किंग ब्रेक लगाएं और उसके बाद गियर को 'पार्क' में डालें, खासकर ढलान या असमतल जगह पर।

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गलत तरीके से टोइंग और सिस्टम पर जोर
अगर कार को गलत तरीके से टो किया जाए, जैसे फ्रंट-व्हील ड्राइव कार को आगे के पहियों के सहारे घसीटना, तो ट्रांसमिशन को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसी तरह कीचड़ या बर्फ में फंसी गाड़ी को जल्दी-जल्दी रिवर्स और ड्राइव में बदलकर निकालने की कोशिश करने से क्लच जल सकते हैं और सिस्टम ओवरहीट हो जाता है। हमेशा निर्माता द्वारा बताए गए टोइंग नियमों का पालन करना ही सुरक्षित विकल्प है।

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सावधानी से बढ़ेगी ट्रांसमिशन की उम्र
ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की लंबी उम्र के लिए सही ड्राइविंग आदतें और समय पर मेंटेनेंस बेहद जरूरी हैं। थोड़ी सी समझदारी न सिर्फ महंगे रिपेयर से बचाती है। बल्कि आपकी कार की परफॉर्मेंस और भरोसेमंद चलने की क्षमता भी बनाए रखती है।

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