पहले इस तकनीक में क्या समस्या थी?
अब तक ऑल-आयरन फ्लो बैटरियों की सबसे बड़ी समस्या उनकी कम स्थिरता और जल्दी खराब होना था।
बैटरी के अंदर रासायनिक असंतुलन के कारण इसकी क्षमता तेजी से घट जाती थी, जिससे इसका उपयोग सीमित हो जाता था।
नए शोध में क्या सफलता मिली है?
चीनी विज्ञान अकादमी के तहत वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान खोजने का दावा किया है।
उन्होंने एक नया और अधिक स्थिर इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया है, जो हजारों चार्ज-डिस्चार्ज साइकिल के बाद भी क्षमता को लगभग बनाए रखता है।
यह उपलब्धि बैटरी की उम्र और भरोसेमंद प्रदर्शन को काफी बढ़ा सकती है।
यह बैटरी कैसे काम करती है?
ऑल-आयरन फ्लो बैटरियां लोहे और पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट पर निर्भर करती हैं।
यह तकनीक सस्ती है और बड़े स्तर पर ऊर्जा स्टोरेज के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
हालांकि, अब तक इसकी स्थिरता की समस्या के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पाया था।
इस सफलता के पीछे क्या तकनीक है?
वैज्ञानिकों ने ‘सिनर्जिस्टिक डिजाइन’ नामक रणनीति का उपयोग किया है।
इसमें एक विशेष आयरन कंप्लेक्स तैयार किया गया, जो बैटरी के अंदर सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
यह तकनीक बैटरी के सक्रिय पदार्थ को खराब होने से बचाती है और उसकी कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखती है।
क्या यह ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है?
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो यह ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
कम लागत और लंबी उम्र के कारण यह नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को और बढ़ावा दे सकती है।
यह इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य डिवाइसों के लिए भी एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।