कौन-सा नियम बदलेगा और किस पर लागू होगा?
केंद्रीय मोटर वाहन नियम में प्रस्तावित ड्राफ्ट संशोधन के अनुसार, भारत में बनने या आयात होने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर) गाड़ियों का माइलेज टेस्ट AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा।
- इस नए मानक में टेस्टिंग के दौरान AC ऑन रहेगा
- इसका मकसद उपभोक्ताओं को ज्यादा यथार्थवादी माइलेज आंकड़े देना है
- साथ ही, निर्माताओं के लिए अनुपालन की शर्तें भी सख्त होंगी
ड्राफ्ट नियमों पर 30 दिनों तक सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।
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सेफ्टी टेस्टिंग में भी क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
अलग से, मंत्रालय ने वाहन सुरक्षा आकलन को अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) (भारत एनसीएपी) 2 के नए मानक 1 अक्तूबर 2027 से लागू होंगे।
नवंबर 2025 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एनसीएपी 2 में पहली बार कमजोर सड़क उपयोगकर्ता (VRU) सुरक्षा को कुल रेटिंग में 20 प्रतिशत वेटेज दिया गया। जो यूरोपीय मानकों के अनुरूप है।
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Bharat NCAP 2 में किन आकलन क्षेत्रों को शामिल किया गया है?
नए फ्रेमवर्क में कुल पांच आकलन क्षेत्रों को अनिवार्य किया गया है:
- क्रैश प्रोटेक्शन: 55 प्रतिशत
- कमजोर सड़क उपयोगकर्ता प्रोटेक्शन: 20 प्रतिशत
- सेफ ड्राइविंग फीचर्स: 10 प्रतिशत
- क्रैश अवॉइडेंस: 10 प्रतिशत
- पोस्ट-क्रैश सेफ्टी: 5 प्रतिशत
इससे सेफ्टी रेटिंग अधिक व्यापक और व्यवहारिक होने की उम्मीद है।
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माइलेज टेस्ट में एसी ऑन करने का औचित्य क्या है?
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट के मुताबिक, वाहन उपयोग के पैटर्न बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि 10-15 साल पहले सभी कारों में एसी नहीं होता था और जहां होता भी था, वहां उसका इस्तेमाल सीमित था। आज की स्थिति में एसी का उपयोग आम और नियमित हो गया है।
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उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि एसी ऑन के साथ टेस्टिंग से:
- लैब में निकले माइलेज आंकड़े वास्तविक ड्राइविंग के ज्यादा करीब होंगे
- शुरुआती तौर पर घोषित माइलेज थोड़ा कम दिख सकता है
- लेकिन उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं और वास्तविक अनुभव बेहतर तरीके से मेल खाएंगे
कुल मिलाकर, यह बदलाव माइलेज दावों को ज़्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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