टायर का कोड समझें
हर टायर पर साइड में एक कोड लिखा होता है, जैसे - 215/60R17. इसमें 215 टायर की चौड़ाई (मिलीमीटर में), 60 टायर की ऊंचाई का अनुपात (साइडवाल रेशियो), R का मतलब रेडियल टायर और 17 इंच में रिम का साइज बताता है। अगर साइडवॉल नंबर कम है, तो गाड़ी की परफॉर्मेंस बेहतर होगी, लेकिन आराम थोड़ा कम मिलेगा।
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जरूरत के हिसाब से टायर चुनें
हर टायर हर मौसम और सड़क के लिए सही नहीं होता। अगर आपको मिक्स कंडीशंस में गाड़ी चलानी पड़ती है, तो ऑल-सीजन टायर बेस्ट हैं। गर्म जगहों के लिए समर टायर सही रहते हैं, जबकि बर्फीली या फिसलन भरी जगहों पर विंटर टायर ज्यादा ग्रिप देते हैं।
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टायर की मजबूती, ग्रिप और गर्मी झेलने की क्षमता देखें
हर टायर पर UTQG मार्किंग होती है। इसमें तीन बातें लिखी होती हैं -
- ट्रेडवियर (टिकाऊपन): जितना ज्यादा नंबर, टायर उतना लंबा चलेगा।
- ट्रैक्शन (ग्रिप): A से लेकर AA तक का रेटिंग होता है, जिसमें AA सबसे ज्यादा ग्रिप देता है।
- टेम्परेचर (गर्मी सहने की क्षमता): A सबसे अच्छा माना जाता है।
साथ ही टायर के डिजाइन (ट्रेड पैटर्न) भी अलग-अलग काम करते हैं - कोई पानी को जल्दी बाहर निकालता है, तो कोई ज्यादा पकड़ (ग्रिप) देता है।
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टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट चेक करें
पुराने टायर दिखने में नए लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी परफॉर्मेंस कम हो जाती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, 6-10 साल से पुराने टायर इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। टायर पर DOT कोड के बाद 4 अंक लिखे होते हैं। जैसे 1224 का मतलब है कि टायर 2024 की 12वीं हफ्ते में बना था।
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