इंजन से लेकर ब्रेक और सस्पेंशन तक, हर हिस्सा लगातार दबाव में रहता है। अगर इन्हें समय पर चेक करके बदला न जाए, तो कार का प्रदर्शन गिरने लगता है, माइलेज कम हो जाता है, और ब्रेकडाउन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, इस स्टेज पर उन पार्ट्स पर खास ध्यान देना जरूरी है, जिन्हें बदलना सबसे ज्यादा जरूरी है। आइए जानते हैं कि इतनी माइलेज के बाद कौन से पार्ट्स बदलवाने चाहिए।
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इंजन, बेल्ट और ब्रेक सिस्टम का करें निरीक्षण
1.25 लाख किलोमीटर चलने के बाद, सबसे पहले इंजन की स्थिति पर ध्यान दें। इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर और एयर फिल्टर को बदल दें। क्योंकि इतनी दूरी तय करने के बाद इनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। टाइमिंग बेल्ट और फैन बेल्ट की भी जांच कराएं, क्योंकि इनके टूटने से इंजन को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी तरह, ब्रेक पैड्स और डिस्क भी इस समय तक घिस चुके होते हैं, जिससे ब्रेकिंग कमजोर हो जाती है, इसलिए इन्हें बदलवा लेना सुरक्षित है।
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इसके अलावा, क्लच प्लेट भी स्लिप होने लगती है, इसलिए इसकी पूरी तरह से जांच कराना जरूरी है। यदि आपकी कार पेट्रोल से चलती है, तो पिकअप और माइलेज दोनों बनाए रखने के लिए स्पार्क प्लग भी बदल दें। ये छोटे बदलाव कार के ओवरऑल परफॉर्मेंस को फिर से नया जीवन दे सकते हैं।
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सस्पेंशन, टायर और बैटरी को बदलें
इतनी माइलेज के बाद सस्पेंशन सिस्टम का ढीला हो जाना आम बात है। गाड़ी झटके देने लगती है और राइड कम्फर्ट कम हो जाता है। इसलिए, शॉक एब्जॉर्बर और बुशिंग्स को बदलवाना सबसे अच्छा है। टायर की ग्रिप और ट्रेड डेप्थ की जांच करें। अगर वे घिस चुके हैं या उनमें दरारें हैं, तो तुरंत नए टायर लगवा लें। बैटरी की क्षमता भी कम होने लगती है, इसलिए इसे टेस्ट करवाएं या जरूरत पड़ने पर बदल दें। साथ ही, कूलेंट, ब्रेक फ्लूइड और ट्रांसमिशन ऑयल को भी बदलवा लें, ताकि कार का प्रदर्शन और लाइफ दोनों बनी रहे।
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