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FADA Warning: नई कार खरीदने की बना रहे हैं योजना? बढ़ सकता है बजट और डिलीवरी का इंतजार; ये है वजह

Mon, 06 Apr 2026 04:39 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Auto Sector Supply Chain: भारत के ऑटोमोबाइल बाजार ने बीते वित्त वर्ष में शानदार बिक्री दर्ज की है, लेकिन अब नई कार या बाइक खरीदने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चेन बिगड़ गई है। इसकी वजह से आने वाले समय में गाड़ियां महंगी हो सकती हैं और डिलीवरी के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
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फाडा के अनुसार, आने वाले समय में गाड़ियों की डिलीवरी में देरी हो सकती है (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik and fada.in
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विस्तार
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बीते वित्तीय वर्ष में भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया और बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए। लेकिन, अब नई कार या बाइक खरीदने का प्लान बना रहे लोगों के लिए एक चिंता की खबर है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में गाड़ियों की डिलीवरी में देरी हो सकती है और कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा विवाद है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है:

विवाद का ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ रहा है?

पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद का ऑटो सेक्टर पर गहरा और सीधा असर पड़ रहा है। दरअसल, युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही, गाड़ियां बनाने में इस्तेमाल होने वाले अहम मेटल्स जैसे एल्युमिनियम, तांबा और स्टील भी काफी महंगे हो गए हैं। कच्चे माल की इन बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स (ट्रांसपोर्टेशन) की लागत में इजाफे का सीधा बोझ अब ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले हफ्ते ही देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने भी संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही अपनी कारों के दाम बढ़ा सकते हैं।

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महंगाई के साथ-साथ ग्राहकों को नई गाड़ी के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। FADA के एक हालिया सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा डीलर्स को फिलहाल गाड़ियों की सप्लाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि लगभग 17.1% डीलर्स ने तो शोरूम तक गाड़ियों के पहुंचने में तीन हफ्ते या उससे ज्यादा की देरी होने की बात कही है। कुल मिलाकर, इस वैश्विक तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे आने वाले समय में गाड़ियां महंगी भी होंगी और उनकी डिलीवरी में भी समय लगेगा।

ग्राहकों की पसंद पर असर

इन वैश्विक चुनौतियों का सीधा असर ग्राहकों के मूड और उनकी पसंद पर भी दिख रहा है। सप्लाई चेन बिगड़ने का सबसे ज्यादा असर भले ही कमर्शियल गाड़ियों पर हो रहा हो, लेकिन पैसेंजर कारों और टू-व्हीलर्स के कुछ खास वेरिएंट्स के लिए भी ग्राहकों को अब डिलीवरी का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सिर्फ डिलीवरी की देरी ही नहीं, बल्कि महंगे ईंधन की मार भी ग्राहकों को परेशान कर रही है। सर्वे में शामिल लगभग 36.5% डीलर्स ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए ग्राहक अब नई गाड़ी खरीदने के अपने फैसले पर दोबारा विचार करने लगे हैं।

राहत की बात: मार्च में हुई बंपर बिक्री

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत की बात यह रही कि पिछला वित्तीय वर्ष बिक्री के लिहाज से काफी शानदार साबित हुआ। दरअसल, टैक्स में कटौती होने की वजह से ग्राहकों की खरीदारी क्षमता बढ़ी, जिसका नतीजा यह रहा कि पूरे वित्तीय वर्ष में ऑटोमोबाइल की कुल रिटेल बिक्री में 13.3% का शानदार उछाल आया। अगर सिर्फ मार्च महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह और भी उत्साहजनक रहा। मार्च में कुल बिक्री 25.28% बढ़ गई। इस दौरान ग्राहकों ने जमकर गाड़ियां खरीदीं। जहां टू-व्हीलर्स की बिक्री में सबसे ज्यादा 28.68% की जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई, वहीं पैसेंजर कारों में 21.48% और कमर्शियल व्हीकल्स में 15.12% का मजबूत इजाफा देखा गया।

बाजार में इस तेज मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शोरूम में कारों के खड़े रहने का औसत समय लगातार छठे महीने कम हुआ है। पिछले साल मार्च में जो कारें ग्राहकों के इंतजार में औसतन 52 दिन तक शोरूम में खड़ी रहती थीं, इस बार मार्च की बंपर सेल में वे सिर्फ 28 दिनों के भीतर ही बिक गईं।

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