बेंग्लूरू से 60 किलोमीटर दूर नंदी हिल्स पर टीपू सुल्तान का लॉज भी है।
- फोटो : Amit Dwivedi
भारत विविधिताओं से भरा देश है यहां पर भाषा और वाणी और मौसम के तेवर बदलने में महज कुछ किलोमीटर का अंतर होता है। अबकी बार नए साल पर एक ऐसी ड्राइव की जो समुद्र तट के साथ-साथ पूरा हुआ और जब मंजिल पर वापस आए तब तक स्पीडोमीटर पर 5000 किलोमीटर की दूरी जुड़ चुकी थी। 31 दिसंबर को जब पूरी दुनिया नया साल मनाने के लिए क्लब जाने का इंतजार कर रही थी उस समय मैं मुंबई में कुर्ला स्थित टोयोटा के डीलरशिप से न्यू फार्चूनर की 10 दिन की ड्राइव के लिए डिलीवरी ले रहा था। उगता सूरज इसके पहले तपने लगता मैं अपनी मंजिल के तरफ निकल पड़ा। मेरी मंजिल थी पुदूचेरी। एक समुद्र तटीय ड्राइव पर निकलने से पहले मैंने फॉर्चूनर को ही इसलिए चुना क्योंकि मुझे टोयोटा की उस विश्वसनीयता का एक इम्तिहान लेना था जिसने जम्मू से कन्याकुमारी तक लोगों के दिलों में जगह बना रखी है। पुणे, सातारा, बेलगाम, चित्रदुर्ग, बेंग्लूरू होते हुए पुदूचेरी की ड्राइव में एक चीज जो कॉमन थी वह थी फॉर्चूनर। भले ही लोग अंग्रेजी या हिंदी न जानते हों लेकिन फॉर्चूनर की पहचान सबको है बस फर्क था कि वह न्यू फॉर्चूनर को देखकर आश्चर्य कर रहे थे कि ये कब आ गई। तो आइए आपको करवाता हूं एक ऐसी ड्राइव जिसमें सिर्फ 5 हजार किलोमीटर ही शामिल नहीं हैं बल्कि एक कार की योग्यता का भी पूरा प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
मुंबई से बेंग्लूरू
मुंबई से बेंग्लूरू की दूरी लगभग 1000 किलोमीटर की है।
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मुंबई से बेंग्लूरू की दूरी लगभग 1000 किलोमीटर की है। एनएच 48 यहां तक पहुंचता है। मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे के जरिए आप पुणे तक जल्दी पहुंच जाते हैं लेकिन इसके आगे सातारा तक डायवर्जन की वजह से ड्राइव काफी स्लो रहती है। हालांकि मुझे ज्यादा मुश्किल इसलिए नहीं हो रहा था क्योंकि मैं 6 स्पीड सिक्वेंशियल ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली 4*4 डीजल फार्चूनर ड्राइव कर रहा था।
न्यू फार्चूनर की ड्राइविंग का फायदा आपको उस समय पूरा मिलता है जब आप भारी ट्रैफिक में हों। इसके पैडल शिफ्टर के सहारे मैं यहां के हाईवे पर पूरी तरह से रोड ब्लॉक करके चलते ट्रकों को पीछे छोड़ रहा था। न्यू फार्चूनर सिटी में जहां कार की तरह अहसास कराती है तो वहीं कठिन ड्राइविंग परिस्थिति में अपना नेचर उसके अनूकूल बदल लेती है। सातारा से लगभग 70 किलोमीटर पार करने के बाद खुला हाईवे आपका स्वागत करता है।
यह रास्ता ऐसा है जिस पर आप सिर्फ गाड़ी को क्रूज कंट्रोल पर डाल दो और स्टीयरिंग संभाल के रखो अच्छा माइलेज भी मिलेगा और ड्राइविंग का मजा भी आएगा। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि मुझे फॉर्चूनर की कार लाइक फील का आनंद उठाना था। पैडल शिफ्टर के सहारे मैं पूरे इंथ्यूजियाज्म के साथ बेंगलुरू की ओर बढ़ रहा था। इस ड्राइविंग के दौरान एक बात समझ नहीं आई कि टोल वसूलने का सरकारी सिस्टम क्या है। अगर 100 किलोमीटर के अंदर 120 रुपये नेशनल हाईवे पर टोल चुकाना पड़े तो कोई भी यह बात सोचेगा। पर ऐसा क्यूं है इसका पता लगाने की कोशिश अगले किसी और आलेख में करेंगे।
तुमकुर बेंगलुरू का सबर्ब जैसा है और यहां तक पहुंचने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई लेकिन इसके बाद लगभग 60 किलोमीटर तक का व्हाइट फील्ड तक का सफर मैंने 5 घंटे में पूरा किया। लेकिन शुक्र है कि टोयोटा फार्चूनर के कार जैसे अहसास ने मुझे थकने नहीं दिया। जब ड्राइव पूरी हुई तो पता चला कि अब एक बड़ी एसयूवी से भी ऐसी लंबी दूरी की ड्राइव की जा सकती है जिसमें थकान कम और फन ज्यादा होगा।
बेंग्लूरू से पुदूचेरी
बेंग्लूरू से पुदूचेरी
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एक रात आराम करने के बाद अब मंजिल थी पुदूचेरी की। बेंग्लूरू से पुदूचेरी जाने के लिए एनएच 75 व एनएच 77 से होकर जाना पड़ता है। एनएच 77 पर महज 110 किलोमीटर चलने के बाद जब आप एनएच 75 पर पहुंचते हैं तो यह सिंगल रास्ता है और काफी ऊबड़-खाबड़ भी है। बेंग्लूरू से पुदचेरी की दूरी लगभग 311 किलोमीटर की है। लेकिन अनजाने में ही सही मुझे एक ऐसा रास्ता मिल गया था जहां पर लगभग 200 किलोमीटर चलना था और रास्ता खराब और अच्छे पैच का मिश्रण था। इस हाईवे पर पहुंचते ही मैंने पैडल शिफ्टर से ध्यान हटाकर गाड़ी को ड्राइव मोड में डाल दिया और स्पीड पर थोड़ा नियंत्रण रखते हुए आराम से मंजिल की तरफ क्रूज करने लगा।
बड़े-बड़े गड्ढे हर कदम पर मेरा स्वागत कर रहे थे। मंजिल काफी दूर लग रही थी पर आराम एक था कि गड्ढों से हो रही परेशानी केबिन में हमें ज्यादा परेशान नहीं कर रही थी। फार्चूनर का माइलेज प्रभावित हो रहा था पर शक्ति इतनी थी मानो किसी जंग के लिए हम जा रहे हों। 2.7 लीटर इंजिन के साथ नई फार्चूनर ऑटोमेटिक उस हर मुश्किल के लिए तैयार रहती है जो ड्राइविंग कंडीशन में आपको परेशानी में डाल सकते हैं।
पूदूचेरी में न्यू फार्चूनर
174 बीएचपी की शक्ति के साथ फार्चूनर हर रास्ते पर खुद को साबित कर रही थी।
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मंजिल कोई भी क्यूं न हो आएगी पर कितनी देर में आएगी यह रास्ते पर निर्भर करता है। पुदूचेरी पहुंचने में हमें पूरे नौ घंटे लगे और इस दौरान हमने सिंगल हाईवे का पूरा लुत्फ उठा लिया था। लेकिन अचानक थोड़ी देर के लिए हम एक डबल हाईवे पर आ पहुंचे जिस पर हमें सिर्फ तीन किलोमीटर चलना था, यह हाईवे कोयंबटूर को कनेक्ट कर रहा था। लेकिन तीन किलोमीटर बाद जब पूदूचेरी के लिए हमने राइट लिया तो एक बहुत ही अच्छी सिंगल रोड मिली जिस पर ट्रैफिक तो था पर सड़क मखमली थी।
174 बीएचपी की शक्ति के साथ फार्चूनर हर रास्ते पर खुद को साबित कर रही थी। लेकिन पूदूचेरी में न्यू फार्चूनर को देखने वालों का तांता लगा रहा और लोग हमारी इस गाड़ी के साथ फोटो खिंचवाते नजर आ रहे थे तो कुछ लोग सेल्फी ले रहे थे। इससे पता चलता है कि यह एक गुड लुकिंग एसयूवी है जिसमें लोगों को काफी दिलचस्पी है।
एनएच 75
पुदूचेरी से गोवा की दूरी गूगल मैप के हिसाब से 828 किलोमीटर की है।
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पुदूचेरी से गोवा की दूरी गूगल मैप के हिसाब से 828 किलोमीटर की है। लेकिन मैं सलाह दूंगा कि आप स्टेट हाईवे पांच से होते हुए एनएच 40 पर उतरें और सीधे आगे बढ़ते हुए एनएच 75 को पकड़ें। इससे आपकी दूरी 100 किलोमीटर तक बढ़ जाएगी लेकिन आप समय बचा लेंगे।
गोवा यात्रा
बेंगलूरू से हुबली तक एनएच 48 के जरिए आप पहुंचते हैं
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बेंगलूरू से हुबली तक एनएच 48 के जरिए आप पहुंचते हैं और इसके बाद गोवा के लिए सिंगल रोड मिलता है जो आपको सीधा गोवा तक ले जाता है। गोवा तक सिंगल हाईवे काफी संकरा है और एक जंगल से होकर जाता है। यहां पर ओवरटेकिंग बहुत मुश्किल होती है और कॉर्नर पर गाड़ी को संभालना अधिक गति में इतना आसान नहीं रहता। हुबली से गोवा तक टायरों को मैंने कई बार चीखने को मजबूर किया। फार्चूनर कॉर्नर पर अंडर या ओवरस्टीयर तो नहीं होती लेकिन ऐसा लगता है कि इसके टायर इन मोड़ों पर खुद को ज्यादा सहज महसूस नहीं करा पाते। लेकिन वहीं दूसरी ओर जब आप कॉर्नर पार करते हैं तो यह अपनी लाइन में पूरी तरह से बनी रहती है।
गोवा ड्राइव
गोवा में ड्राइविंग के दौरान फार्चूनर ने कई चुनौतियों का सामना किया।
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गोवा में ड्राइविंग के दौरान न्यू फॉर्चूनर ने अलग-अलग अनुभव किए। गोवा के लगभग सभी रास्ते संकरे हैं और इन राहों में ओवरटेकिंग करना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। लेकिन फॉर्चूनर ने हमें ऐसा करने का आत्मविश्वास दिया। 1.855 मीटर चौड़ी, 4.795 मीटर लंबी और 1.835 मीटर ऊंची एक कार अगर कार जैसा अहसास ऐसे रास्तों पर कराए तो तारीफ करनी बनती है। जेडब्यू मैरियट होटल से पैलोलम बीच की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। वाटर स्पोर्ट के लिए गोवा का यह बीच मेरे पसंदीदा बीचों में से एक है।
अगर आप गोवा घूमने आए हैं तो एक दिन पूरा आप इस बीच पर गुजार सकते हैं। यहां पर वाटरस्पोर्ट के सारे संसाधन मौजूद हैं। यहां पहुंचने के लिए लगभग 30 किलोमीटर बाद ही संकरा पहाड़ी रास्ता शुरू हो जाता है जिसमें ढेर सारे मोड़ आते हैं और यहां पर एक बड़ी गाड़ी के साथ तालमेल बिठाना थोड़ा मुश्किल लगता है लेकिन मैं सिर्फ एक्सीलरेट करते हुए और स्टीयरिंग को जरूरत के हिसाब से टर्न करते हुए आगे बढ़ रहा था। ऐसी जगहों पर ड्राइवर और स्टीयरिंग का तालमेल बेहद जरूरी होता है, मुझे इसके स्टीयरिंग से जो फीडबैक मिल रहा था वह बेहत जीवंत था। अगर स्टीयरिंग व्हील का साथ मिलता रहे तो ड्राइविंग आसान हो जाती है और मेरे साथ ऐसा ही हो रहा था। 1 घंटे 35 मिनट में जब हम यहां पहुंचे तो मेरी कार में बैठे दो और लोग घूमने के बजाए फार्चूनर के गुड़गान में लग गए।
गोवा से मुंबई
नार्थ गोवा में एक कसीनो के पास खड़ी फॉर्चूनर।
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गोवा से मुंबई की दूरी लगभग 600 किलोमीटर की है। लेकिन यह पहला मौका था जब मैंने कोंकण रूट न लेकर बेलगांव होते हुए मुंबई बेंग्लूरू हाईवे पकडकर मुंबई पहुंचा। यह दूरी मैंने महज 8 घंटे में पूरी की। जब मैंने गाड़ी टोयोटा को लौटाई तब तक इसके स्पीडोमीटर पर मेरे तरफ से 5000 किलोमीटर दर्ज हो चुके थे। यह एक शानदार कोस्टल ड्राइव थी जिसमें टोयोटा फार्चूनर ने हर एंगल से मुझे सपोर्ट किया और यह साबित किया कि आखिर में टोयोटा अपनी विश्वसनीयता के लिए क्यूं जानी जाती है।