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सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले सावधान: इन तीन तरह की गाड़ियों से रहें दूर, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

Sun, 25 Oct 2026 11:46 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पानी में डूबी कार खरीदने से बचें।
  • बड़े एक्सीडेंट वाली गाड़ी की जांच करें।
  • आरसी और इंश्योरेंस जैसे दस्तावेज देखें।
  • सर्विस रिकॉर्ड से किलोमीटर की पुष्टि करें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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कार आज के समय में स्टेटस सिंबल के साथ एक बड़ी जरूरत बन चुकी है, लेकिन हर कोई नई कार नहीं खरीद पाता। यही वजह है कि लोग सेकंड हैंड कार का रुख करते हैं। हालांकि, पुरानी गाड़ी खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही आपको महंगे में पड़ सकती है। देखने में भले ही कार चमकती हुई लगे, लेकिन इंजन और गियरबॉक्स की खराबी बाद में आपकी जेब खाली कर सकती है। इसलिए गाड़ी खरीदने से पहले उसकी तकनीकी जांच जरूर करवा लें। इनमें से कुछ के बारे में लेख में बताया गया है...

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1. पानी में डूबी और बड़े एक्सीडेंट वाली कार

  • बाढ़ या बारिश के पानी में डूबी कार: अगर आप कोई ऐसी कार खरीद रहे हैं, जो कार बाढ़ या भारी बारिश के पानी में डूब चुकी है, तो उसे खरीदने से बचें। पानी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, तारों और सेंसर को नुकसान पहुंचाता है। बाद में ये पार्ट्स काम करना बंद कर सकते हैं। सीटों और अंदरूनी हिस्सों में सीलन और बदबू भी रहती है।
  • बड़े एक्सीडेंट वाली कार: इसी के साथ बड़े एक्सीडेंट वाली कार भी न लें, खासकर अगर चेसिस या फ्रेम को नुकसान पहुंचा हो। बाहर से ठीक दिखने पर भी अंदर से कमजोर होती है। खरीदने से पहले भरोसेमंद मैकेनिक से जांच जरूर कराएं।

2. बिना कागजात और सर्विस रिकॉर्ड वाली कार से बचें

  • दस्तावेजों की जांच: आरसी, वैध इंश्योरेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज जरूर देखें। बेचने वाला अगर ये नहीं दिखा रहा तो जल्दबाजी में सौदा न करें।
  • सर्विस हिस्ट्री और मीटर रीडिंग: इसी के साथ सर्विस हिस्ट्री चेक करें कि समय पर देखभाल हुई है या नहीं। मीटर पर कम किलोमीटर दिख रहे हों लेकिन सर्विस रिकॉर्ड न हो, तो शक करें (मीटर में छेड़छाड़ हो सकती है)।
  • बैंक लोन स्थिति: साथ ही अगर कार पर बैंक का लोन बकाया है, तो पहले लोन चुकाने और बैंक के दस्तावेज की पुष्टि करें। नहीं तो नाम ट्रांसफर में परेशानी हो सकती है।

3. बंद हो चुके मॉडल और खराब हालत वाली कार न लें

  • बंद हो चुके मॉडल्स: बंद हो चुके मॉडल या ऐसी कारें जिनकी कंपनियां भारत में कारोबार बंद कर चुकी हैं, उनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते। रिपेयर में समय और पैसे ज्यादा लग सकते हैं।
  • पूर्व में टैक्सी रही कारें: यह जांच करना बेहद जरूरी होता है। पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल हुई कारों में ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतें। ये लंबे समय तक चलाई जाती हैं, जिससे इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन पर ज्यादा असर पड़ता है।
  • टेस्ट ड्राइव की चेतावनी: टेस्ट ड्राइव के दौरान अगर साइलेंसर से नीला धुआं निकले, गियर बदलते समय झटके लगें या कार एक तरफ खिंचे, तो अच्छी तरह जांच कराएं। इन समस्याओं को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।

टेस्ट ड्राइव के दौरान किन संकेतों पर दे ध्यान?

  • कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर लें। इस दौरान साइलेंसर से नीला धुआं निकलने, गियर बदलते समय झटके लगने या कार के एक तरफ खिंचने जैसी समस्याओं पर ध्यान देना ग्राहक के लिए फायदेमंद हो सकता है। ये गाड़ी में किसी खराबी का संकेत हो सकती हैं और ऐसे में मैकेनिक से जांच कराना बेहतर हो सकता है।
  • अगर आप इन लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, तो हो सकता है कि मरम्मत का खर्च बढ़ जाए। इसलिए टेस्ट ड्राइव के दौरान कोई असामान्य आवाज, झटका या दूसरी समस्या महसूस हो, तो सौदा करने से पहले उसकी वजह पता करें।
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