एंट्री-लेवल सेगमेंट में कीमत सबसे बड़ी चुनौती
खासतौर पर एंट्री-लेवल सेगमेंट में ईवी की कीमत आम खरीदारों के लिए अब भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार नीति स्तर पर सहयोग दे, तो ईवी को ज्यादा किफायती बनाया जा सकता है।
समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, ईवी कंपोनेंट निर्माता इंगार इलेक्ट्रॉनिक्स की निदेशक रचना आहूजा का कहना है कि, मैन्युफैक्चरर्स के लिए प्रोत्साहन योजनाएं उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी और लागत कम होगी। उन्होंने कहा कि कम ब्याज दर वाले लोन, टैक्स छूट और इंडस्ट्रियल लैंड अलॉटमेंट जैसी नीतियां निवेश को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी बड़ी बाधा
ईवी सेक्टर के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार एक अहम जरूरत बना हुआ है। रचना आहूजा का कहना है कि ‘रेंज एंग्जायटी’ यानी रास्ते में चार्जिंग स्टेशन न मिलना और बैटरी खत्म होने का डर, अब भी ग्राहकों के फैसलों को प्रभावित करती है। चार्जिंग नेटवर्क की कमी के कारण ईवी फिलहाल बड़े शहरों तक ही सीमित रह जाते हैं।
यह भी पढ़ें - Economic Survey 2026: भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार छह साल में 63% CAGR से बढ़ा, आर्थिक सर्वेक्षण में दिखी रफ्तार
सरकारी योजनाओं से मिला है EV को सहारा
नीति स्तर पर केंद्र सरकार पहले ही FAME-II, पीएम ई-ड्राइव, प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएं शुरू कर चुकी है। इनका मकसद ईवी को अपनाने को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और मैन्युफैक्चरिंग को देश में ही बढ़ाना है। उद्योग को उम्मीद है कि बजट में इन योजनाओं को और मजबूत तथा विस्तारित किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन फाइनेंस से जुड़े मर्चेंट बैंकर अविजित भट्ट का कहना है कि पीएम ई-ड्राइव सब्सिडी को फ्लीट ईवी तक बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि ग्रीन मोबिलिटी को और बढ़ावा मिल सके।
कच्चे माल की कीमतें बढ़ा रहीं लागत
उद्योग ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक बाजार में तांबा और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उछाल से मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ रही है। हालांकि इन वैश्विक कारकों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। लेकिन सब्सिडी योजनाएं लागत के असर को कुछ हद तक कम कर सकती हैं। जिससे ईवी भारतीय मिडिल क्लास की पहुंच में बने रहें।
यह भी पढ़ें - FASTag: एक फरवरी 2026 से फास्टैग का नया नियम, ड्राइवरों के लिए एनएचएआई की अहम गाइडलाइन
तीन-पहिया सेगमेंट में सबसे ज्यादा EV अपनाने का स्तर
फिलहाल भारत में ईवी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी तीन-पहिया सेगमेंट में है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बेहतर फाइनेंसिंग, आकर्षक छूट और सरकारी प्रोत्साहन मिलते रहें, तो एंट्री-लेवल कारों से लेकर मिड-साइज एसयूवी और प्रीमियम सेगमेंट तक ईवी को अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर बढ़ रहा फोकस
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन अब केंद्र सरकार का जोर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विद्युतीकरण पर ज्यादा है। क्योंकि इससे शहरी आबादी के बड़े हिस्से को फायदा मिलता है।
दिल्ली में FAME योजना के तहत ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के बेड़े में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। इसके अलावा, मेट्रो स्टेशनों तक आखिरी मील कनेक्टिविटी के लिए छोटी DEVi इलेक्ट्रिक बसें भी तैनात की जा रही हैं।
यह भी पढ़ें - EV: ईवी बूम के साथ यूरोप के कार बाजार में चीनी ब्रांड्स की बड़ी छलांग, हर 10 में एक कार चीन में बनी
2030 तक के लक्ष्य बरकरार
सरकार 2030 तक निजी कारों में करीब 30 प्रतिशत, दो पहिया और तीन पहिया वाहनों में 80 प्रतिशत और कमर्शियल वाहनों में 70 प्रतिशत ईवी हिस्सेदारी के लक्ष्य पर काम जारी रखेगी। बजट से मिलने वाला समर्थन इन लक्ष्यों को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
यह भी पढ़ें - Traffic Violations: हर महीने 20 हजार चालान कम, जानें NH-44 पर स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का कैसे हो रहा असर