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Budget 2019: ऑटो सेक्टर की वाहनों पर GST कम करने की मांग

Fri, 05 Jul 2019 11:15 AM IST
Bani Kalra बनी कालरा, अमर उजाला
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बजट 2019 - फोटो : Amar ujala
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भारत में ऑटो सेक्टर इन दिनों मंदी के दौर से गुजर रहा है। लगातार 3 महीने से गाड़ियों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल रही है। बीएस6 उत्सर्जन मानकों की वजह से गाड़ियों की लागत भी बढ़ी है, इंश्योरेंस भी महंगा हुआ है और कच्चा माल महंगा होने से भी ऑटो सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ा है। ऐसे में ऑटो सेक्टर को इस बार बजट से काफी उम्मीदें हैं।

बजट से उम्मीदें

ऑटो सेक्टर को उम्मीद है कि इस बार बजट में सरकार उद्योग को बढ़ावा देगी और वाहनों पर लगने वाले 28 फीसदी जीएसटी को कम करेगी। फिलहाल ऑटो बाजार में गाड़ियों की गिरती बिक्री का सिलसिला जारी है, ऐसे में यदि जीएसटी की दरों में कटौती होती है, तो इससे गाड़ियों की मांग बढ़ेगी, जो पिछले 11 महीनों से बहुत कम है।

सरकार इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगी।  

ह्यूंदै मोटर इंडिया के सीनियर मैनेजर एंड ग्रुप हेड, मार्केटिंग पुनीत आनंद ने कहा कि बजट 2019 से उम्मीद है कि सरकार ऑटो इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगी। गिरती सेल्स के पीछे रेट ऑफ इंटरेस्ट में बढ़ोतरी, फाइनेंशियल चैलेंजेस, मानसून की लेट-लतीफी जैसे कारण हैं, जुलाई का महीना वैसे ही मानसून वाला होता है, जिससे सेल्स पर निगेटिव असर पड़ता है। लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि अगस्त-सितम्बर महीने से बिक्री बढ़ेगी।  

हेलमेट पर न लगे जीएसटी

बजट 2019 को लेकर स्टीलबर्ड हेलमेट के एमडी राजीव कपूर, का कहना है कि “हेलमेट पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिये, क्योंकि हेलमेट दवाओं की तरह ही जीवन रक्षक डिवाइस है। इसलिए जिस तरह जीवनरक्षक दवाओं पर कोई जीएसटी नहीं है, उसी तरह हेलमेट पर भी छूट दी जानी चाहिए। उनका कहना है हर दिन लगभग 13 लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं। इनमें से कई मौतें हेलमेट की क्वालिटी खराब होने के चलते होती हैं। ऐसे देश में जहां लोग हेलमेट को वित्तीय बोझ समझते हैं, वहीं जीरो प्रतिशत जीएसटी अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट में लोगों का विश्वास जीतने में मदद करेगा और उन्हें इसके महत्व को खरीदने और समझने के लिए प्रेरित करेगा।”

इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी का हो

लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के सीईओ आयुष लोहिया का कहना है कि नई सरकार इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर जीएसटी स्लैब को घटाकर 0 से 5 प्रतिशत कर दे तो अच्छा रहेगा। इसके अलावा, आने वाले समय में सरकार को सब्सिडी आदि की पेशकश करके बिक्री को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि इन वाहनों की मांग काफी बढ़ जाए और ईवी की आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए योजना भी होनी चाहिए। साथ ही, जीएसटी ग्राहक लागू दरों के साथ व्यापक लाभ प्राप्त करेगा। उद्योग को उम्मीद है कि नई सरकार पारंपरिक लीड-एसिड बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को ध्यान में रखेगी और यह फेम-2 के दूसरे चरण के तहत सब्सिडी का दावा करने के लिए पात्र होगा, क्योंकि यह बिक्री को बढ़ाएगा। 

पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने की मांग

सेटको ऑटोमोटिव के वाइस चेयरमैन उदित शेठ ने कहा कि इस बजट में हम सरकार से बुनियादी प्रदूषण परियोजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन की उम्मीद करते हैं, इसके अतिरिक्त, हम कृषि क्षेत्र के लिए और अधिक बढ़ावा की उम्मीद करते हैं और भारत में आगे माल की आवाजाही को बढ़ाने के लिए व्यापार के माहौल को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं।”

आम बजट से है ऑटो सेक्टर की प्रमुख मांगें

  • देश में 15 साल पुरानी गाड़ियों को बदलने के लिए इन्सेंटिव होना चाहिए
  • टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर पर कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए
  • मौजूदा समय में बाइक और कार पर 50 से 100 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी है
  • भारत में पैसेंजर कारों के लिए एक से अधिक टैक्स रेट हटाने की मांग
  • R&D पर वेटेड डिडक्शन 150 प्रतिशत से बढ़ाकर 200 प्रतिशत बढ़ाए जाने मांग
  • देश में स्क्रैपेज पॉलिसी को बढ़ावा देने की जरूरत
  • इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से कम करके 5 प्रतिशत करने की मांग

 

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