"नीति बनाते वक्त हमें भी साथ बैठाया जाए"
IAMAI ने चिट्ठी में यह साफ कहा कि बाइक टैक्सी आज शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम का अहम हिस्सा बन चुकी है और इस पर पॉलिसी बनाने से पहले सरकार को उद्योग से बातचीत जरूर करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में लाखों लोग रोजाना बाइक टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं। जिससे न सिर्फ ट्रैफिक की दिक्कत कम होती है, बल्कि हजारों गिग वर्कर्स की रोजी-रोटी भी इससे जुड़ी है।
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सरकार से की संयुक्त कमेटी बनाने की मांग
IAMAI ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार एक संयुक्त कमेटी बनाए, जिसमें परिवहन विभाग के अधिकारी, इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और गिग वर्कर्स या बाइक टैक्सी यूनियन के सदस्य हों। इस तरह सबकी राय से एक ऐसी नीति बनाई जा सकती है जो संतुलित और सबके हित में हो।
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पॉलिसी बनने तक मिले अस्थायी परमिट
IAMAI ने यह मांग भी की है कि जब तक नई नीति लागू नहीं होती, जो एग्रीगेटर कंपनियां सुरक्षा नियमों का पालन कर रही हैं, उन्हें अस्थायी परमिट दिया जाए। ताकि वे अपनी सेवाएं जारी रख सकें और लोगों को असुविधा न हो।
IAMAI ने दोहराया कि वे सरकार के साथ मिलकर एक संतुलित, न्यायसंगत और टिकाऊ रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, जिससे आम जनता की सुविधा भी बनी रहे और गिग इकोनॉमी को भी नुकसान न पहुंचे।
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सरकार की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं
फिलहाल कर्नाटक सरकार ने IAMAI की इस चिट्ठी का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। लेकिन यह साफ है कि आने वाली नीति बाइक टैक्सी ऑपरेटरों और गिग वर्कर्स की आजीविका पर बड़ा असर डाल सकती है।
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