सरकार के समर्थन से शुरू हुई नई कैब सर्विस 'भारत टैक्सी' भारतीय सड़कों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, शुरुआती दौर में इसे कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि इस को-ऑपरेटिव (सहकारी) राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म को ओला और उबर जैसी स्थापित प्राइवेट कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। इसके अलावा, कई ड्राइवर ऐसे भी हैं जो अभी नई डिजिटल तकनीक को अपनाने से हिचकिचा रहे हैं।
राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि इन शुरुआती रुकावटों को दूर करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। ड्राइवरों को तकनीक सिखाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, एप के यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने और ई-गवर्नेंस टूल्स के जरिए जागरूकता फैलाने पर काम चल रहा है।
भारत टैक्सी की नींव 8 राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं द्वारा 6 जून 2025 को रखी गई थी। इसके बाद इस साल 5 फरवरी को इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग के बाद से ही इसे ड्राइवरों का जबरदस्त साथ मिला है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 23 मार्च तक इस प्लेटफॉर्म से लगभग 4.31 लाख ड्राइवर-पार्टनर जुड़ चुके हैं। वर्तमान में यह सर्विस दिल्ली-NCR के साथ-साथ गुजरात के तीन प्रमुख शहरों- अहमदाबाद, राजकोट और सूरत में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रही है। विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब चंडीगढ़ और लखनऊ में भी ड्राइवरों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य इसे केवल बड़े शहरों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि अगले तीन वर्षों में इसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से होते हुए देश के कोने-कोने में स्थित जिला और तहसील स्तर तक पहुंचाने की योजना है।
ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भारत टैक्सी एक बड़े क्रांतिकारी बदलाव के रूप में उभर रही है, क्योंकि इसका पूरा बिजनेस मॉडल पारंपरिक कंपनियों से बिल्कुल जुदा है। जहां ओला और उबर जैसी कंपनियां हर राइड पर ड्राइवरों से भारी कमीशन वसूलती हैं, वहीं भारत टैक्सी जीरो कमीशन के सिद्धांत पर चलती है। यह एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित है। इसका सीधा मतलब है कि यात्रा से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे ड्राइवर की जेब में जाता है।