बारिश के दौरान कार का अगर सही से ध्यान रखा जाए तो कार आराम से बारिश की कोई भी परेशानी झेल लेती है। कई लोगों को लगता है कि मानसून में बारिश को ज्यादा लिक्विड की जरूरत नहीं होती है। मगर यह गलत है, बारिश के मौसम में भी कार को फ्ल्यूड की उतनी ही आवश्कता होती है, जितनी गर्मी के दौरान होती है। इंजन में समय-समय पर लिक्विड डालने से उसकी क्षमता पर अच्छा असर पड़ता है।
कई बार देखा गया है कि वाहन में फ्ल्यूड का स्तर अधिक हो जाता है तो फिर गाड़ी के अलग-अलग हिस्सों से लीकेज होने लगती है। कार से किसी भी तरह की लीकेज एक गंभीर विषय है, ऐसे में वक्त रहते लीकेज की समस्या को दूर करना चाहिए। समय-समय पर गाड़ी में कभी भी लीकेज होने पर बिना देर किए किसी काबिल मैकेनिक को दिखाना चाहिए, ताकि कार के ब्रेक समेत अन्य उपकरणों में ज्यादा दिक्कत न हो।
एक पुरानी कार में सबसे पहले टायरों की जांच करनी चाहिए, अगर टायरों में किसी तरह का लीकेज या फिर टायरों पर किसी तरह का उभार नजर आए तो सही समय पर उसकी जांच करवा लें। इसके साथ ही टायरों में पंक्चर और क्रेक की भी सही से जांच करें। बारिश में कार चलाने से पहले एक बार टायरों में एयर प्रेशर को चेक कर लें।
पुरानी कार में एक बड़ी दिक्कत ये होती है कि उसके कौन से पार्ट में कब समस्या आ जाए, यह कहना काफी मुश्किल है। अगर पुरानी कार के किसी भी उपकरण में कोई परेशानी है तो बिन देर किए उसे बदल दें, वरना बारिश के दौरान कार सवारियों की परेशानी बढ़ा सकती है। पुरानी कार के ब्रेक, टायर और सस्पेंशन को खास तौर पर चेक करना चाहिए।
अंत में बारिश के मौसम में अगर आप पुरानी कार को सही ढंग से चलाएंगे तो फिर कार में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। भले ही पुरानी कार है, मगर कार से प्यार करिए और उसका खास तरीके से ध्यान रखिए। चाहे बारिश का मौसम या फिर कोई अन्य मौसम, मगर कार की सफाई से लेकर उसके हर पार्ट का पूरा ध्यान रखें।