सर्दियों में कोहरा बढ़ते ही सड़क पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है। भोर या रात में तो यह दिक्कत और भी बढ़ जाती है। ऐसे में कार की हेडलाइट और फॉग लाइट की भूमिका खास हो जाती है। कई ड्राइवर मानते हैं कि सफेद रोशनी जितनी ज्यादा चमकदार होगी, कोहरे में उतनी ही बेहतर विजिबिलिटी मिलेगी, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कार की लाइट में इस्तेमाल होने वाली 1000K, 4300K और 6000K जैसी केल्विन रेटिंग उसके रंग को बताती है, रोशनी की चमक को नहीं। इतना ही नहीं, कोहरे में सफेद रोशनी कई बार सामने देखने में परेशानी भी बढ़ा सकती है। आइए समझते हैं कि पीली, न्यूट्रल व्हाइट और ठंडी सफेद रोशनी में क्या अंतर है और कोहरे में कौन-सी लाइट ज्यादा काम आ सकती है।
कार की लाइट में केल्विन रेटिंग का क्या मतलब होता है?
- कार की हेडलाइट या फॉग लाइट खरीदते समय आपने 1000K, 4300K और 6000K जैसी रेटिंग जरूर देखी होगी। दरअसल, केल्विन (K) लाइट के कलर टेम्परेचर यानी रंग की प्रकृति को बताता है। आसानी से समझें तो कम केल्विन रेटिंग वाली लाइट ज्यादा पीली या गर्म दिखाई देती है, जबकि अधिक केल्विन रेटिंग वाली लाइट सफेद और हल्के नीले रंग की दिखती है।
- हालांकि, केल्विन से यह पता नहीं चलता कि लाइट कितनी तेज है। इसकी चमक लुमेन आउटपुट, ऑप्टिक्स की क्षमता, बीम के आकार और लाइट के एंगल पर निर्भर करती है। इसलिए सिर्फ ज्यादा केल्विन रेटिंग देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि वह लाइट सड़क को बेहतर रोशन करेगी।
1000K: बेहद गर्म एम्बर रंग की रोशनी
- 1000K कलर टेम्परेचर वाली लाइट गहरे एम्बर यानी पीले-नारंगी रंग की दिखाई देती है। यह सामान्य पीली फॉग लाइट से भी अलग होती है। ऑटोमोटिव लाइटिंग में इस रेटिंग का इस्तेमाल आमतौर पर नहीं होता।
- कुछ परिस्थितियों में गर्म या सिलेक्टिव येलो लाइट सड़क पर कंट्रास्ट बेहतर करने और आंखों पर पड़ने वाली तेज चमक को कम करने में मदद कर सकती है।
- हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 1000K की हर लाइट कोहरे को आसानी से काट सकती है। इसके लिए लैंप का आउटपुट, बीम पैटर्न और अलाइनमेंट भी सही होना जरूरी है।
- अगर किसी प्रोडक्ट पर 1000K की रेटिंग लिखी है, तो खरीदने से पहले उसकी वास्तविक स्पेसिफिकेशन और सड़क पर इस्तेमाल की मंजूरी जरूर जांचें।
4300K: रोजाना ड्राइविंग के लिए व्यावहारिक विकल्प
- 4300K की लाइट न्यूट्रल से थोड़ी गर्म सफेद दिखाई देती है। यह पीली रोशनी और 6000K की ठंडी सफेद रोशनी के बीच का विकल्प है।
- इसका रंग न तो बहुत ज्यादा पीला होता है और न ही इसमें तेज नीला टिंट दिखाई देता है। यही वजह है कि इसे रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए एक व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।
- अगर आप शहर की सड़कों के साथ हाईवे पर भी गाड़ी चलाते हैं, तो 4300K की लाइट संतुलित रोशनी का अनुभव दे सकती है।
- हालांकि, इसे खासतौर पर कोहरे को काटने वाली लाइट नहीं समझना चाहिए। घने कोहरे में सही डिजाइन वाली सिलेक्टिव येलो फॉग लाइट कुछ परिस्थितियों में बेहतर कंट्रास्ट दे सकती है।
6000K: ठंडी सफेद रोशनी में होता है हल्का नीला टिंट
- 6000K की लाइट ठंडी सफेद दिखाई देती है, जिसमें हल्का नीला टिंट भी होता है। आफ्टरमार्केट एलईडी और एचआईडी लाइट्स में इस कलर टेम्परेचर का इस्तेमाल काफी आम है।
- सूखी सड़कों पर इसकी रोशनी कई ड्राइवरों को ज्यादा चमकदार और साफ लग सकती है। लेकिन कोहरे में इसका प्रदर्शन हमेशा बेहतर हो, यह जरूरी नहीं है।
- अगर लाइट ज्यादा पावरफुल है या उसका अलाइनमेंट सही नहीं है, तो सामने से आने वाले वाहन चालकों और खुद ड्राइवर को भी ग्लेयर की परेशानी हो सकती है।इसलिए सिर्फ सफेद और चमकदार दिखाई देने के आधार पर 6000K को कोहरे के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं माना जा सकता।
कोहरे में कौन-सी लाइट बेहतर काम करती है?
इसे समझने के लिए तीनों कलर टेम्परेचर के बीच अंतर देखना जरूरी है।
| कलर टेम्परेचर |
लाइट का रंग |
इस्तेमाल |
| 1000K |
गहरा एम्बर |
असामान्य, स्पेसिफिकेशन जांचना जरूरी |
| 4300K |
न्यूट्रल या गर्म सफेद |
रोजमर्रा की ड्राइविंग |
| 6000K |
ठंडी सफेद, हल्का नीला टिंट |
साफ मौसम में पसंद किया जाने वाला विकल्प |
साफ मौसम में पसंद किया जाने वाला विकल्प
- कोहरे में किसी एक रंग को हर परिस्थिति के लिए सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह यह है कि कोहरे की घनता, सड़क की स्थिति, लैंप का डिजाइन और बीम पैटर्न भी विजिबिलिटी को प्रभावित करते हैं।
- वहीं, एक रोड-लाइटिंग स्टडी में पाया गया कि कम कलर टेम्परेचर वाली रोशनी ने करीब 102 मीटर की मापी गई विजिबिलिटी वाले कोहरे में ज्यादा दूरी तक देखने में मदद की। वहीं, जब विजिबिलिटी बेहतर थी, तब ज्यादा कलर टेम्परेचर वाली सफेद रोशनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि यह नतीजे किसी खास टेस्टिंग पर आधारित हैं। इन्हें हर कार और हर तरह के फॉग लैंप पर लागू नहीं किया जा सकता।
कोहरे में सिर्फ लाइट का रंग नहीं, बीम पैटर्न भी जरूरी
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कार की फॉग लाइट चुनते समय सिर्फ उसके रंग और केल्विन रेटिंग पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उसका बीम पैटर्न भी उतना ही खास होता है।
- कोहरे में ऐसी फॉग लाइट बेहतर मानी जाती है, जिसका बीम चौड़ा और नीचे की तरफ नियंत्रित हो। इससे सड़क के नजदीकी हिस्से पर रोशनी पड़ती है और हवा में मौजूद पानी की बूंदों से वापस आने वाली चमक को कम रखने में मदद मिलती है।
- इसके अलावा हेडलाइट और फॉग लाइट का सही अलाइनमेंट भी जरूरी है। गलत तरीके से लगी या ज्यादा ऊपर की तरफ रोशनी फेंकने वाली लाइट सामने देखने में परेशानी पैदा कर सकती है।
कोहरे में गाड़ी चलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
विशेषज्ञ कहते हैं कि सर्दियों में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सिर्फ अच्छी हेडलाइट लगाना काफी नहीं है। इसके लिए कुछ जरूरी सावधानियां भी बरतनी चाहिए।
- कोहरे में हाई बीम के बजाय डिप्ड हेडलाइट का इस्तेमाल करें।
- जरूरत पड़ने पर ही फॉग लाइट चालू करें।
- गाड़ी की रफ्तार कम रखें।
- आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
- हेडलाइट और फॉग लाइट का अलाइनमेंट सही रखें।
- ऐसी लाइट लगवाएं जिसका बीम पैटर्न नियंत्रित हो और जो सड़क पर इस्तेमाल के लिए स्वीकृत हो।