पुराने सर्कुलर का अब सख्ती से पालन
मार्च 2025 में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने दोपहिया वाहनों पर एक्सप्रेसवे पर चलने से रोक लगाने का सर्कुलर जारी किया था। लेकिन उस पर सख्ती से अमल नहीं हो पाया। पुलिस ने बताया कि अब भी बाइक, ऑटो, बैलगाड़ी और ट्रैक्टर जैसे वाहन एक्सप्रेसवे पर चलते देखे जा रहे थे, जो खुद के साथ दूसरों की जान को भी जोखिम में डाल रहे थे।
अब सख्त कार्रवाई होगी
बीईएमएल नगर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि अब एक्सप्रेसवे पर चेतावनी वाले साइनबोर्ड लगा दिए गए हैं और दोपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टरों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। जो भी नियम तोड़ेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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एक्सप्रेसवे की विशेषताएं और उद्देश्य
बंगलूरू-चेन्नई एक्सप्रेसवे दक्षिण भारत का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी अधिकतम गति सीमा 120 किमी प्रति घंटा है। लेकिन धीमी गाड़ियों की मौजूदगी इसकी मूल भावना के खिलाफ है। और सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा पैदा करती है।
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68 किमी वाला खुला सेक्शन और ट्रैफिक
फिलहाल, कर्नाटक में होस्कोटे से लेकर बेतमंगला तक 68 किमी का टोल-फ्री हिस्सा जनता के लिए खुला है। जहां हर दिन करीब 1,600 से 2,000 वाहन गुजरते हैं। अधिकारियों का मानना है कि धीमी गाड़ियों पर रोक से न सिर्फ यात्रा सुगम होगी, बल्कि जान-माल का नुकसान भी रोका जा सकेगा।
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तीन राज्यों से गुजरता है ये मेगा प्रोजेक्ट
260 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर गुजरता है और चेन्नई के पास श्रीपेरुंबदूर में खत्म होता है। यह 17,900 करोड़ रुपये की लागत से बना एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। जिसका मकसद बंगलूरू से चेन्नई के बीच की यात्रा को 7 घंटे से घटाकर सिर्फ 3 घंटे करना है।
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