दायरा बढ़ा, ई-रिक्शा और ई-कार्ट भी शामिल
इस संशोधित नियम का सबसे अहम पहलू यह है कि अब इसके दायरे में ई-रिक्शा और ई-कार्ट को भी शामिल किया गया है। नियामकीय भाषा में कहें तो MoRTH ने पहले से लागू M और N कैटेगरी के साथ अब L5 और L7 वाहन श्रेणियों को भी इसमें जोड़ दिया है। यह फैसला खास तौर पर शहरी इलाकों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जहां लगभग बिना आवाज चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
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सार्वजनिक सुझावों के लिए ड्राफ्ट जारी
मंत्रालय ने इस प्रस्तावित नियम को सार्वजनिक किया है और लोगों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ड्राफ्ट के अंतिम रूप लेने के बाद यह नियम अक्तूबर 2026 से देश में बिकने वाले सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू होगा। वहीं, जो मॉडल पहले से बिक्री में हैं, उनके निर्माताओं को अक्तूबर 2027 तक AVAS सिस्टम फिट करना अनिवार्य होगा।
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AVAS क्या है और क्यों जरूरी है
ध्वनिक वाहन चेतावनी प्रणाली यानी AVAS एक ऐसा सुरक्षा फीचर है, जिसे खास तौर पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए विकसित किया गया है। चूंकि ये वाहन कम गति पर लगभग खामोशी से चलते हैं, इसलिए आसपास मौजूद लोगों को इनके आने का अंदाजा नहीं लग पाता। AVAS इसी समस्या का समाधान करता है। यह सिस्टम बाहरी स्पीकर की मदद से एक कृत्रिम आवाज पैदा करता है, जो वाहन की गति के साथ बदलती रहती है। और खास तौर पर कम स्पीड या रिवर्स करते समय सक्रिय रहती है, जब दुर्घटना की आशंका ज्यादा होती है।
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किन वाहनों पर लागू होगा नियम
वाहन श्रेणियों की बात करें तो M कैटेगरी में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन जैसे कार और बसें आती हैं, जबकि N कैटेगरी में इलेक्ट्रिक ट्रक और माल ढुलाई वाले वाहन शामिल हैं। नए नियम के तहत जोड़ी गई L5 श्रेणी में तीन पहिया वाहन, जैसे यात्री और कार्गो ऑटो-रिक्शा आते हैं। जबकि L7 में भारी क्वाड्रिसाइकिल शामिल होती हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर यूटिलिटी या कार्गो जरूरतों के लिए किया जाता है।
इस कदम के जरिए सरकार का मकसद साफ है- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देते हुए सड़क सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न करना। ताकि आने वाले वर्षों में ईवी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम कम किया जा सके।
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