रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर संकट से गुजर रही ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनियों के लिए यह एक मौका भी है। ताकि वे वैश्विक तौर पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर चीन का विकल्प बन सकें। दुनिया भर में आए आर्थिक संकट को देखते हुए देश की मजबूत कंपनियां दूसरे देशों की फर्मों और टेक्नोलॉजी को खरीद सकती हैं। वहीं ऐसा करने से दूसरे देशों का विकल्प बनने के लिए स्थिति अधिक मजबूत होगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।
बता दें कि ऑटो इंडस्ट्री सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली इंडस्ट्री है। लेकिन फिलहाल लॉकडाउन के चलते मंदी के दौर से गुजर रही है। आने वाले महीनों में भी इसका असर देखने को मिलेगा। क्योंकि माना जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद भी ग्राहक जल्दी से शोरूम लौटने वाले नहीं है।
सोसाइटी ऑफ इंडयिन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक ऑटो सेक्टर की मार्च महीने की पैसेंजर वाहनों की बिक्री में 51 फीसदी की कमी आई है। जबकि मार्च 2019 में 2.91 लाख गाड़ियों की बिक्री हुई थी। वहीं मार्च 2020 में यह आंकड़ा 1.43 लाख पर ही सिमट कर रह गया। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक ऑटो कंपनियां रोजाना 2300 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।