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Rare Earths: चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक से ऑटो कंपनियों को झटका, जानें किस-किसने रोका उत्पादन

Fri, 06 Jun 2025 05:00 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुनिया भर की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों और उनके पार्ट्स सप्लायर्स को इन दिनों एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। और इसकी वजह है चीन द्वारा रेयर अर्थ, दुर्लभ खनिजों और मैग्नेट के निर्यात पर लगाई गई रोक।
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Car Plant - फोटो : Volkswagen
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विस्तार
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दुनिया भर की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों और उनके पार्ट्स सप्लायर्स को इन दिनों एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। और इसकी वजह है चीन द्वारा रेयर अर्थ, दुर्लभ खनिजों और मैग्नेट के निर्यात पर लगाई गई रोक। इसका असर इतना बड़ा है कि कुछ कंपनियों को अपने कुछ मॉडल्स का उत्पादन तक रोकना पड़ा है।
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रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी खनिजों) से बने मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मोटर्स, खिड़कियों और ऑडियो स्पीकर्स जैसे कई हिस्सों में किया जाता है। इनकी कमी अब कंपनियों की सप्लाई चेन को गहरा नुकसान पहुंचा रही है।

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किस-किसने रोका प्रोडक्शन
फोर्ड ने मई महीने में एक हफ्ते के लिए अमेरिका के शिकागो प्लांट में अपनी एक्सप्लोरर एसयूवी का उत्पादन रोक दिया। वजह थी दुर्लभ खनिजों की कमी।

सुजुकी मोटर ने 26 मई से अपनी सबसे पॉपुलर कार Swift (स्विफ्ट) का उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया। कंपनी ने इसकी वजह पार्ट्स की कमी बताई है और उम्मीद जताई है कि 13 जून से आंशिक तौर पर उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। और 16 जून के बाद पूरी तरह से वापस पटरी पर आ जाएगा। हालांकि दो लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यह बंदी सीधे तौर पर चीन की पाबंदियों से जुड़ी हुई है। लेकिन सुजुकी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।

यूरोप की ऑटो सप्लायर एसोसिएशन CLEPA ने 4 जून को बताया कि यूरोप की कई कंपनियों के कारखानों और उत्पादन लाइनों को भी इन खनिजों की कमी के चलते बंद करना पड़ा है।

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सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती चिंता
भारत की बजाज ऑटो ने चेतावनी दी है कि अगर चीन से दुर्लभ मैग्नेट की सप्लाई में और देरी होती है। तो जुलाई तक उनकी इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोडक्शन पर इसका 'गंभीर असर' पड़ सकता है।

ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी Bosch (बॉश) ने कहा है कि उनके सप्लायर्स को चीन से एक्सपोर्ट लाइसेंस लेने के लिए ढेर सारे डाक्यूमेंट्स और जानकारी जमा करनी पड़ रही है, जिससे सप्लाई में रुकावट आ रही है।

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बीएमडब्ल्यू ने माना कि उनके कुछ सप्लायर्स इस कमी से प्रभावित हुए हैं। लेकिन कंपनी की अपनी फैक्ट्रियां अभी तक सामान्य रूप से चल रही हैं।

मारुति सुजुकी, जो भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी है, ने कहा कि अभी तक उनके उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है।

जर्मनी की ZF कंपनी, जो ऑटो पार्ट्स सप्लाई करती है, उसने कहा कि दुर्लभ खनिजों की कमी का असर उसके कुछ सप्लायर्स पर पड़ा है। हालांकि कंपनी खुद सीधे ये कच्चा माल नहीं खरीदती।

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आगे की राह चुनौतीपूर्ण
इस समय जो स्थिति बनी है, उससे साफ है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके कंपोनेंट्स के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों पर चीन की निर्भरता दुनिया की कई ऑटो कंपनियों के लिए एक गंभीर जोखिम बन चुकी है। अगर यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले महीनों में कई कंपनियों को और भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

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