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Auto PLI: वित्त वर्ष26 में ऑटो पीएलआई योजना के तहत ₹2,000 करोड़ का भुगतान, योजना को मिला बड़ा बढ़ावा

Wed, 31 Dec 2025 09:16 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत FY26 में ऑटोमेकर्स और स्पेयर पार्ट मैन्युफैक्चरर्स को लगभग 2,000 करोड़ रुपये दिए हैं।
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Car Plant - फोटो : Volkswagen
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए लागू प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) योजना के तहत अब तक करीब 2,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की है। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, लंबित 40-50 करोड़ रुपये का भुगतान भी फरवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि FY26 ऑटो पीएलआई योजना के लिए अब तक का सबसे सफल वर्ष साबित हुआ है। 
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पांच साल में ₹25,938 करोड़ का लक्ष्य
ऑटो पीएलआई योजना की शुरुआत 2021 में की गई थी, जिसके तहत पांच वर्षों में कुल 25,938 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। योजना के पहले वर्ष में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ओला इलेक्ट्रिक और टोयोटा किर्लोस्कर ऑटो पार्ट्स को मिलाकर कुल 322 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। इसके बाद योजना ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी।
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FY26 में नौ कंपनियों को मिला इंसेंटिव
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल नौ कंपनियों को PLI प्रोत्साहन दिया गया, जिनमें पांच वाहन निर्माता और चार ऑटो कंपोनेंट निर्माता शामिल हैं। वाहन निर्माताओं में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और ओला इलेक्ट्रिक शामिल हैं। वहीं, कंपोनेंट सेगमेंट में दिल्ली-टीवीएस टेक्नोलॉजीज, सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स, बॉश ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स को लाभ मिला। 

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निवेश लक्ष्य के करीब, शुरुआती वर्षों में तेज खर्च
मंत्रालय के मुताबिक, इस योजना के तहत कुल 42,500 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से दूसरे वर्ष तक 35,657 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर निवेश शुरुआती वर्षों में हुआ है और आने वाले समय में इसकी गति कुछ धीमी हो सकती है। हालांकि, इन निवेशों से तैयार किए गए शून्य-उत्सर्जन वाहनों की बिक्री आने वाले वर्षों में तेज होने की उम्मीद है।

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Car Plant - फोटो : Freepik
82 में से 18 कंपनियां शर्तें पूरी करने में सफल
पीएलआई-ऑटो योजना के तहत अब तक 82 कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। जिनमें से 18 कंपनियां निवेश और लोकलाइजेशन से जुड़ी शर्तों को पूरा कर चुकी हैं। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जिन 10 कंपोनेंट निर्माताओं ने अब तक कोई निवेश नहीं किया है, उनकी बैंक गारंटी जब्त की जाएगी। 

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बजट आवंटन और आगे की चुनौती
इससे पहले खबर आई थी कि वित्त वर्ष 26 में ऑटो पीएलआई योजना के तहत कुल भुगतान करीब 2,000 करोड़ रुपये रहेगा। और अगले वित्त वर्ष के लिए बजट आवंटन लगभग 5,500 करोड़ रुपये हो सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पहले दो वर्षों में कुल वितरण योजना के कुल बजट का करीब 10 प्रतिशत ही है। जिससे संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में और तेजी लाने की जरूरत है।

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EV बिक्री और क्लीन टेक पर फोकस जरूरी
ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) के एसोसिएट डायरेक्टर शरीफ कमर के अनुसार, अब तक कुल आवंटन का सिर्फ 10 प्रतिशत ही उपयोग हुआ है और अभी तीन साल बाकी हैं। उनका मानना है कि पूरा बजट खर्च करना चुनौतीपूर्ण होगा। और इसके लिए सरकार को क्लीन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ वाहन सुरक्षा बढ़ाने वाली तकनीकों पर भी ध्यान देना चाहिए। 

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लोकलाइजेशन से MSME सेक्टर को फायदा
मंत्रालय ने बताया कि इस योजना के चलते लोकलाइजेशन और घरेलू वैल्यू एडिशन में बढ़ोतरी हुई है। जिससे ऑटो सेक्टर के हजारों सूक्ष्म और लघु उद्यमों को फायदा पहुंचा है। पीएलआई-ऑटो योजना के तहत किसी भी उत्पाद को इंसेंटिव के लिए कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू वैल्यू एडिशन पूरा करना अनिवार्य है। अब तक आठ वाहन निर्माता और 10 कंपोनेंट निर्माता 131 उत्पादों के लिए इंसेंटिव क्लेम करने के योग्य हो चुके हैं।

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Car Plant - फोटो : Freepik
ऑटो सेक्टर के लिए दीर्घकालिक संकेत
सरकार का मानना है कि ऑटो पीएलआई योजना न केवल इलेक्ट्रिक और स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। बल्कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और टेक्नोलॉजी विकास के लिए भी मजबूत आधार तैयार कर रही है। आने वाले वर्षों में ईवी बिक्री में तेजी के साथ इस योजना का प्रभाव और व्यापक होने की उम्मीद है। 

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