देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाएं हमें और गरीब बना रही हैं। सिर्फ गरीब ही नहीं बल्कि यह दुर्घटनाएं हमारे देश के एक बड़े तबके को मानसिक रोगी भी बना रही हैं। अगर सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया गया तो स्थितियां और विकराल होती चली जाएंगी। विश्व बैंक की हाल में जारी रिपोर्ट 'ट्रैफिक क्रैश इंजरी एंड डिसेबिलिटी: दि बर्डन ऑन इंडियन सोसाइटी' में देश में होने वाली दुर्घटनाओं और उसके पड़ने वाले प्रभाव पर कई जानकारियां सामने आईं हैं।
सड़क सुरक्षा पर आधारित यह सर्वे उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में जुटाए गए आंकड़ों पर तैयार किया गया है। इन चार राज्यों में सर्वे के दौरान पता चला कि जिस परिवार में दुर्घटना हुई, उस पूरे परिवार की जिंदगी ही बदतर हो गई। चारों राज्यों में किए गए सर्वे के दौरान पता चला कि सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने के बाद या किसी तरीके से अपंग होने के बाद सबसे ज्यादा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ा।
अध्ययन के दौरान यह पता चला कि तकरीबन 50 फीसदी महिलाएं इस दुर्घटना का सबसे ज्यादा असर झेलती हैं। क्योंकि घर को चलाने और कमाने की जिम्मेदारियां इन्हीं 50 फीसदी महिलाओं पर आ जाती है। सर्वे के दौरान यह भी पता चला कि 40 फीसदी महिलाओं की दिनचर्या और सामाजिक स्तर बदल जाता है। शोध यह भी बताता है कि 11 फीसदी महिलाओं को आर्थिक संकट से निपटने के लिए काम करने का समय और तरीका बदल जाता है।
सड़क दुर्घटना के सामाजिक प्रभाव के बारे में भी शोध से पता चलता है। चार राज्यों में किए गए सर्वे से इस बात की तस्दीक हुई है कि जिन परिवारों में घर का मुखिया या कोई भी कमाने वाला व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो 64 फीसदी ऐसे परिवारों के जीवन स्तर में गिरावट आती है। जबकि 50 फीसदी से ज्यादा परिवार के लोगों में मानसिक तनाव और दूसरी बीमारियां घर कर लेती हैं।