वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) (पीयूसी) नहीं होने पर अगले साल जनवरी से वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) को जब्त किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों की जानकारी को डिजिटल रूप से मोटर वाहन डेटाबेस से जुड़े सर्वरों पर अपलोड किया जाएगा। इससे उल्लंघनकर्ताओं के लिए बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के अपने वाहनों का इस्तेमाल जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने 27 नवंबर को इस बारे में एक मसौदा अधिसूचना जारी किया। इसमें पीयूसी प्रणाली को ऑनलाइन करने से पहले अन्य हितधारकों से सुझाव मांगा गया है और कहा गया है कि इस प्रक्रिया में दो महीने लगेंगे।
अपनी जानकारी देते समय उल्लंघनकर्ताओं द्वारा किसी भी गड़बड़ी की शिकायत की संभावना को खत्म करने के लिए, नई प्रणाली उनके मोबाइल नंबर मांगेगी, जिसके बाद उन्हें वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) प्राप्त होगा। वाहन मालिक द्वारा ओटीपी प्रदान किए जाने के बाद, पीयूसी कर्मचारी उनके नाम पर एक फॉर्म जनरेट करेगा।
7 दिन की मिलेगी मोहलत
जांच के दौरान वैध पीयूसी प्रमाण पत्र नहीं पाया जाता है, तो वाहन मालिक को वैध दस्तावेज प्राप्त करने के लिए सात दिनों की समय दिया जाएगा। इस समय अवधि में ऐसा करने में नाकाम रहने पर वाहन की आरसी को जब्त कर लिया जाएगा। वहीं 7 दिन की निर्धारित समय अवधि के भीतर वाहन का पीयूसी प्रमाणपत्र का रिन्यूअल कराना भी अनिवार्य होगा।
यदि अतिरिक्त धुएं का उत्सर्जन पाया जाता है, तो अधिकारी लोगों से अपने वाहनों को जांच कराने के लिए भी कह सकते हैं। इस मामले में भी, वाहन मालिक को वाहन को दुरूस्त कराने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा। कर्मशियल वाहनों पर भी इसी तरह के नियम लागू होंगे।
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं जो हर रोज बढ़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
पीयूसी प्रमाणपत्र की संख्या में कमी
बता दें, कि पीयूसी प्रमाणपत्र के लिए एक क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा। जिसमें गाड़ी के सभी दस्तावेज जैसे वाहन मालिक का नाम, पंजीकरण संख्या आदि लिखे होंगे। पीयूसी को लेकर कुछ लोग जागरूक हुए हैं लेकिन स्थिति चिंताजनक है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस साल अभी तक पीयूसीसी बनवाने वालों की संख्या पिछले साल की तुलना में डेढ़ लाख से भी कम है।