उत्तर: अभी इसे बिक्री या डिलीवरी के लिए तो बनाया नहीं गया है। लिहाजा अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। जब इसकी बिक्री शुरू होगी, उससे पहले कीमत की घोषणा कर दी जाएगी। अभी तक हमने इसे सिर्फ इसलिए पेश किया है, ताकि बाजार में इस बारे में पूछताछ शुरू हो जाए। इससे हमें अंदाजा मिल जाएगा कि कहां-कहां इसके संभावित खरीदार हो सकते हैं।
प्रश्न: ई-वाहन की बात करें तो बसों में अभी क्या स्थिति है?
उत्तर: बसों की श्रेणी में भी हमने 12 मीटर वाली बस तैयार की है। इससे पहले केंद्र सरकार की फेम-1 योजना के तहत हमने लखनऊ, जम्मू, कोलकाता, इंदौर और गुवाहाटी में बैटरी से चलने वाली बसें उतारी। वहां हमें इसके रखरखाव और चार्जिंग ढांचे भी तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है, ताकि इनका उपयोग बढ़ाया जा सके। अब फेम-2 योजना में भी सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और हमने मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद का टेंडर जीत लिया है।
प्रश्न: बाजार में अभी बड़े वाणिज्यिक वाहनों को लेकर माहौल उत्साहजनक नहीं है। साथ ही बीएस-6 मानक भी लागू हो रहा है जिससे कीमत और बढ़ेगी। ऐसे में जब सस्ते ट्रक नहीं बिक पा रहे तो महंगे ट्रकों को कैसे बेचा जा सकेगा?
उत्तर: बीएस-6 लागू करने का फैसला सरकार का है तो यह लागू होगा ही। हमारी कोशिश है कि हम इस तरह का वाहन ग्राहकों को दें जो उन्हें पुराने वाहनों से बेहतर रिटर्न दे। इसके लिए हमने दो-तीन बुनियादी चीजों पर ध्यान दिया है। पहला कि ट्रकों का ऑपरेटिंग इकोनॉमिक्स उनके पक्ष में हो। बीएस-6 मानक के ट्रक बीएस-4 के मुकाबले न सिर्फ कम धुआं छोड़ते हैं, बल्कि उनका माइलेज भी ज्यादा है। हमने इंजन को भी और शक्तिशाली बनाया है।
पहले जिस ट्रक में 230 हार्सपावर का इंजन होता था, उसमें 300 एचपी का इंजन लगाया। बीएस-6 ट्रकों में कमिन्स का 6.7 लीटर इंजन लगाया है, जो पूरी दुनिया में छह सिलेंडर इंजन की श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकता है। ट्रक के ड्राइवर केबिन को और आरामदेह व सुविधाजनक बनाने के साथ उसके इंटीरियर को कार जैसा रखा है। स्टीयरिंग व्हील भी कार की तरह टच स्क्रीन रखी है और इंफोटेनमेंट सिस्टम लगाया है। अब ट्रक भी कनेक्टेड व्हीकल बन गया, ताकि परिवहन का बेहतर प्रबंधन हो सके।