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ई-वाहन रजिस्ट्रेशन एक चौथाई करने का लक्ष्य, हर तीन किलोमीटर पर मिलेगा चार्जिंग स्टेशन

Wed, 23 Sep 2020 04:54 AM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

  • वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई योजना
  • हर तीन किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन के साथ पार्किंग स्थलों, पार्क, प्राइवेट संस्थानों, भवनों और मॉल में भी लगेंगे चार्जिंग स्टेशन
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Electric Vehicle Charging Station
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विस्तार
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इलेक्ट्रिक वाहनों की सफलता उनके लिए उपलब्ध चार्जिंग स्टेशनों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि दिल्ली सरकार राजधानी में हर तीन किलोमीटर पर एक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। इसके लिए सभी नगर निगमों, पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियों से जगह उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। इसके लिए सभी पार्किंग स्थलों, पार्कों, सार्वजनिक भवनों और प्राइवेट स्थानों पर भी ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

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चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गठित की गई कमेटी के चेयरमैन जैस्मिन शाह ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2024 तक सभी नए वाहनों में एक चौथाई रजिस्ट्रेशन इलेक्ट्रिक वाहनों के हों। वाहनों की यह विशाल संख्या तभी होगी, जब दिल्ली में जगह-जगह पर चार्जिंग स्टेशन हों। लोगों को यह भरोसा हो कि अगर उनके वाहन में बैटरी क्षमता कमजोर पड़ेगी तो वे कहीं भी चार्जिंग करा सकेंगे। इसके लिए निजी भवनों, मॉल, पार्कों और अन्य जगहों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। 

स्वैपिंग बैटरी का भी विकल्प
ई-वाहनों में चार्जिंग की समस्या को खत्म करने के लिए स्वैपिंग बैटरी के मॉडल को भी सफल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लोग ई-चार्जिंग स्टेशनों पर आकर लगभग तीन मिनट के अंदर अपनी कार-मोटरसाइकिल की बौटरी देकर उसके बदले में पूरी तरह से चार्ज बैटरी ले जा सकेंगे। इससे ई-वाहनों को सड़कों पर लाने में बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद की जा रही है। 
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100 किलोमीटर की बैटरी उपलब्ध
ई-वाहन निर्माता कंपनी ओमेगा सेकी मोबिलिटी के चेयरपर्सन उदय नारंग ने कहा कि व्यावसायिक वाहनों को छोड़ दें तो भारत में 95 फीसदी वाहन उपभोक्ता प्रतिदिन 100 किलोमीटर से कम की यात्रा करता है। आज के बाजार में उनके वाहनों में प्रतिदिन 100 किलोमीटर तक चलने की क्षमता है। यानी उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या ऐसी है जो सिर्फ एक बार की फुल चार्जिंग पर अपनी जरूरत पूरी पूरी कर सकते हैं। 

इसके बाद भी बैटरी की क्षमता पर लगातार शोध हो रहा है और इसकी क्षमता सुधारने पर काम चल रहा है। संभावना है कि अगले कुछ वर्षों में ई-वाहनों में ऐसी बैटरी का उपयोग किया जाए जो एक चार्जिंग में 200 किलोमीटर तक की सफल यात्रा कराने में सक्षम हों। 

उदय नारंग के मुताबिक अगले पांच वर्षों के अंदर भारत में लगभग 10 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के बिकने की उम्मीद लगाई जा रही है। यह बिक्री बैटरी की उच्च गुणवत्ता और चार्जिंग की सुविधा पर ही निर्भर करती है। यही कारण है कि बैटरी क्षमता सुधार के साथ-साथ स्वैपिंग बैटरी मॉडल पर भी लगातार काम किया जा रहा है। 

कीमतें कम करने की भी कोशिश
वर्तमान समय में ई-वाहनों की कीमत में लगभग एक चौथाई बैटरी की कीमत होती है। इसके बाद इसके समय-समय पर खराब होने और बदलने की भी आशंकाएं ग्राहकों के मन में होती हैं। लेकिन नई बैटरियों में लंबी लाइफ रखने पर काम किया जा रहा है। एक बैटरी का औसत काम करने का समय पांच साल तक करने में सफलता पाई जा चुकी है। बैटरी की क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इसकी अवधि भी बढ़ेगी, जो ई-वाहनों को ज्यादा सफल बनाने में कारगर रहेगी।

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