आंकड़ों के मुताबिक दो सालों में पुरानी कारों का बाजार 12 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 7800 करोड़ डॉलर से बढ़कर 9,000 करोड़ डॉलर हो गया है। जबकि नई कारों और एसयूवी की बिक्री में अप्रैल से लेकर जून तक 18.4 फीसदी की गिरावट हुई है। वहीं पुरानी कारें बेचने वाली फर्म्स महिन्द्रा फर्स्ट च्वाइस, ड्रूम और ओएलएक्स का कहना है कि पुरानी कारों और एसयूवी की बिक्री 15 फीसदी तक बढ़ी है। जिसके चलते मौजूदा वक्त में पुरानी कारों और एसयूवी का बाजार 48 लाख यूनिट हो गया है, जबकि नई कारों और एसयूवी की 30 लाख यूनिट ही मौजूद हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई कारों के मुकाबले पुरानी कारों की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक कम होती हैं, बावजूद इसके पुरानी कारों का बाजार तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में पैसेंजर व्हीकल्स, कमर्शियल व्हीकल्स और टू-व्हीलर मिला कर पूरे ऑटोमोबाइल मार्केट की वेल्यू 18 हजार करोड़ डॉलर होगी, जिसमें से 50 फीसदी की हिस्सेदारी पुराने वाहनों की होगी।
वहीं अगले पांच सालों में पुरानी कारों और एसयूवी की मांग में बढ़ोतरी होने वाली है। साथ ही, पुरानी कारों के बाजार में एक नया ट्रेंड और सामने आ रहा है। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो पुरानी कार के बदले एक्सचेंज में पुरानी कार ही खरीद रहे हैं। पहले यह ट्रेंड नई कार खरीदने पर होता था, जहां लोग पुरानी कार एक्सचेंज करके नई कार खरीदते थे, लेकिन इस ट्रेंड में तेजी से गिरावट आई है।
वहीं पुरानी कार मार्केट में सेडान या हैचबैक कारों के मुकाबले अभी भी एसयूवी की डिमांड है। पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में जहां 23 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है, वहीं एसयूवी की बिक्री में मात्र 4.5 फीसदी की ही कमी आई है। पुरानी कारों के ऑनलाइन बाजार में जहां एसयूवी की सेगमेंट की लिस्टिंग में 48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं मांग में 24 फीसदी का उछाल आया है। इसकी वजह है कि पिछले कुछ समय से बाजार में हेक्टर और वेन्यू जैसी लेटेस्ट फीचर वाली गाड़ियां लॉन्च हुई हैं, जिसके चलते लोग पुरानी एसयूवी की जगह नई में अपग्रेड कर रहे हैं।