जिसके पहले एमडी संजय गांधी बने। वह दौर ऐसा था कि संजय गांधी को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। अपनी लाख कोशिशो के बावजूद संजय गांधी इस कंपनी को नहीं संभाल पाए और लगातार इसे नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद सन् 1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद मारुति लिमिटेड को जापान की सुजुकी का साथ मिला।
जिसके बाद सबसे पहले मारुति 800 के उत्पादन पर काम किया गया। 14 दिसंबर 1983 को भारत में पहली बार मारुति की कार ने एंट्री की। जिसकी चाबी उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हरपाल सिंह को सौपी।
हालांकि कुछ लोग आज भी इसका श्रेय उन्हें नहीं देना चाहते ।जिस पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और आँध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके नारायण दत्त तिवारी कहते कहा करते थे कि उन्होंने वर्कशॉप में मारुति का डिज़ाइन बनाने की कोशिश की थी। मारुति कार भारत में बन रही है और उसका निर्यात भी किया जा रहा है, लेकिन इसकी नींव संजय गाँधी ने ही डाली थी।