हाल ही में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रलाय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह और भी प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि साल 2017 में 9,408 बच्चों को सड़क दुर्घटना में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यानि भारतीय सड़कों पर रोजाना लगभग 26 बच्चों की मृत्यु हुई।
इन परिणामों के साथ रिपोर्ट राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा कानून और मोटर वाहन संशोधन विधेयक पर भी रोशनी डालती है। रिपोर्ट के अनुसार मात्र 27.7 फीसदी लोग ही जानते हैं कि भारत में मौजूदा कानूनों के तहत रियर सीट-बेल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य है। वहीं 91.4 फीसदी लोगों का मानना है कि भारत में बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा कानूनों को सख्त बनाने की आवश्यकता है।
निसान इण्डिया के प्रेज़ीडेन्ट थाॅमस क्वेहल ने कहा, ‘‘जहां एक ओर भारत में सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।इस पहल के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। हम रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल के बारे में लोगों को जागरुक बनाना चाहते हैं।
सेवलाईफ फाउन्डेशन और शार्प के साथ हमारी सामरिक साझेदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान की पहली प्रावस्था के तहत हम 12 शहरों के 240 स्कूलों में 200000 से अधिक बच्चों तक पहुंचेंगे और उन्हें रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरुक बनाने का प्रयास करेंगे।’’
सीट बेल्ट नहीं लगाना पड़ा भारी
- फोटो : Demo Pic
राष्ट्रीय अध्ययन पर बात करते हुए पीयूष तिवारी, संस्थापक एवं सीईओ, सेव लाईफ फाउन्डेशन ने कहा, ‘‘भारत में पहली बार यह रिपोर्ट हमारी सड़कों पर बाल सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को रोशनी में लेकर आई है। रिपोर्ट में रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल के बारे में लोगों की सोच और उम्मीदों पर भी रोशनी डाली गई है।
सड़कों पर बड़ी संख्या में होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। समय आ गया है कि चाइल्ट हेलमेट, स्कूल ज़ोन में सुरक्षा, चाइल्ड सीट, स्कूली बसों एवं वैन के चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसे प्रावधानों पर विचार किया जाए और देश भर में व्यस्कों को इन मुद्दों के बारे में जागरुक बनाया जाए। हमें उम्मीद है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की मानसिकता बदलने में मदद करेगी।’’
‘रियर सीट-बेल्ट यूसेज़ एण्ड चाइल्ड रोड सेफ्टी इन इण्डिया’ अध्ययन का संचालन शोध फर्म एमडीआरए द्वारा निसान इण्डिया और सेव लाईफ फाउन्डेशन के लिए किया गया। इसमें भारत के 11 शहरों में 6306 लोगों से प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिए गए, 100 गहन विशेषज्ञ साक्षात्कार, दो फोकस्ड ग्रुप चर्चाएं तथा आॅन-साईट प्रेक्षण हुए, जिसमें सीबीसीएस स्कूल बसों द्वारा नियमों के पालन एवं रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल पर जानकारी जुटाई गई।