देश के सभी हिस्सों में मानसून ने दस्तक दे दी है। भारी बरसात के चलते सड़कें टूट रही हैं। राजमार्ग पर बने गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। बड़े हादसों के लिए जहां एक तरफ मानवीय चूक जिम्मेदार है तो वहीं दूसरी ओर वाहनों की तकनीकी खराबी व कमजोर इंफ्रांस्ट्रक्चर भी बरसात में सड़क हादसों को न्योता दे रही है। साल 2020 में मानसून के चलते 36161 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 13283 लोगों की जान चली गई। सड़क हादसों में 34552 लोग घायल हो गए। जलभराव के कारण सड़क पर हुए गड्ढे, कम दृश्यता व फिसलन के कारण उक्त अवधि में 3564 हादसे हुए, जिनमें 1471 लोगों की मौत हुई, जबकि 3064 घायल हो गए।
सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे 'सेव लाइफ फाउंडेशन' के मुताबिक, मानसून में सड़क हादसों की संभावना बढ़ जाती है। सड़क हादसों को लेकर जारी की गई साल 2020 की रिपोर्ट में बरसात के दौरान 36 हजार से अधिक हादसे हुए थे। इनमें 15194 लोग, गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 19358 लोगों को हल्की चोटें लगीं। दिल्ली में इस तरह के 265 हादसे हुए थे। इनमें 36 लोग मारे गए और 325 घायल हुए थे। सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार मानवीय कारणों में ओवर स्पीड, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में ड्राइविंग व रेड लाइट जंप आदि शामिल हैं।
मानसून में सड़क हादसे से घायल होने वाले लोगों के बारे में सेव लाइफ फाउंडेशन (Save Life Foundation) का कहना है कि इसके भी कई कारण हैं। जैसे, वाहन चलाते समय सभी सुरक्षा उपकरणों मसलन सीट बेल्ट, हेलमेट व चाइल्ड रिस्ट्रेंट सिस्टम 'सीआरएस' का इस्तेमाल न करना। इन हादसों के लिए वाहनों से जुड़े कई फैक्टर भी जिम्मेदार होते हैं। जैसे वाहन का ओवरलोड होना, डिफेक्टिव ब्रेक व टायर सिस्टम आदि। इन कारणों के चलते जो हादसे होते हैं, उनमें लोगों के बचने की संभावना बहुत कम होती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से भी सड़क हादसे होते हैं। जलभराव से अगर सड़क पर गड्ढा हुआ है तो जानलेवा हादसे की आशंका बनी रहती है। सड़क पर मरम्मत कार्य चल रहा है और उसे बीच में ही आधा-अधूरा छोड़ दिया जाता है तो उसके चलते भी सड़क हादसा हो जाता है। कंकरीट का ढांचा क्षतिग्रस्त होने पर वहां सही तरीके से साइनेज का इंतजाम नहीं होता। पर्याप्त संख्या में क्रैश बेरियर भी नहीं दिखाई पड़ते। जलभराव से सड़क टूट जाती है और वहां गहरे गड्ढे बन जाते हैं। ऐसे मार्गों पर खासतौर से रात के समय हादसे होने का खतरा बना रहता है। ड्राइवर को पानी के चलते वहां हुए गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता। भारी वाहनों के अलावा दुपहिया वाहन चालक और साइकिल सवार भी ऐसे हादसों का शिकार बनते हैं।
सेव लाइफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी कहते हैं, मानसून में सड़कों से जुड़े कई ढांचागत मुद्दों में जबरदस्त वृद्धि होती है। इनमें सबसे ज्यादा चिंता, सड़क पर बने गड्ढों से होती है। गड्ढे, बरसात के मौसम में सड़क सुरक्षा से संबंधित सबसे बड़े खतरों में से एक हैं। इसके लिए जिम्मेदार मुख्य कारकों में, सड़क सुरक्षा ऑडिट की कमी सामने आई है। सड़क पर जो नियमित रखरखाव का कार्य होना चाहिए, वह नहीं हो पाता। सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग होना, ये भी गड्ढे होने का मुख्य कारण होता है। सड़क पर जलभराव के बीच वाहनों का आवागमन जारी रहता है। कई जगहों पर दोषपूर्ण जल निकासी के कारण सड़क टूट जाती है। उससे वहां पर गड्ढे बन जाते हैं। यही गड्ढे, सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
सेव लाइफ फाउंडेशन, सभी राज्यों से एमवीएए 2019 की धारा 198ए को लागू करने का आग्रह करता है। वजह, यह धारा, उस विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है, जिसके दायरे में वह सड़क आती है। इसके अलावा अपर्याप्त सड़क रखरखाव के लिए ठेकेदार को भी जिम्मेदार ठहराती है। मोटर चालकों से आग्रह है कि मानसून के दौरान वाहन चलाते समय बेहद सतर्कता बरतें। खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए गड्ढों व अन्य दिक्कतों का सटीक आकलन करें।