अप्रैल 2020 से नए बीएस6 उत्सर्जन मानक लागू होने वाले हैं जिसके चलते देश की कई कार कंपनियां अपनी कारों में डीजल इंजन बंद करने का एलान कर चुकी हैं। बुधवार को रेनो की नई एमपीवी रेनो ट्राइबर की लॉन्चिंग के मौके पर कंपनी के ग्लोबल सीईओ थैरी बोलोरे ने पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी 2020 से डीजल कारें बेचना बंद कर देगी
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में डीजल कारों की बिक्री में कमी आ रही है, और ये बड़े पैमाने पर हो रहा है। हमनें इन पर लगाम लगाने की सोच का समर्थन करते हुए कहा कि फैसला किया है कि जब यूरो7 मानक आ जाएंगे, तो ग्लोबल स्तर पर रेनो की कारों में डीजल इंजनों को सीमित किया जाएगा। गौरतलब है कि 2018-19 वित्त वर्ष के खत्म होने पर भरतीय बाजार में डीजल इंजनों की हिस्सेदारी घट कर 10 सालों में सबसे कम मात्र 19 प्रतिशत ही रह गई है।
साथ ही थैरी बोलोरे ने स्पष्ट किया कि रेनो की नई कॉम्पैक्ट एमपीवी ट्राइबर केवल पेट्रोल इंजन में ही आएगी और डीजल इंजन के साथ इसे लॉन्च नहीं किया जाएगा। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य पर उन्होंने कहा कि कंपनी इलेक्ट्रिक कारें कंपनी की योजना का हिस्सा हैं और 2022 से कंपनी इन्हें देश में ही बनाना शुरू करेगी। इसके लिए रेनो स्थानीय कंपनियों के साथ भी पार्टनरशिप करने के लिए तैयार है।
इससे पहले महिंद्रा पहले ही एलान कर चुकी है कि वह एक्सयूवी300, मराजो स्कॉर्पियो और एक्सयूवी 500 में बीएस6 डीजल इंजन देगी, जबकि KUV100 NXT में डीजल इंजन लगाना बंद करेगी। वहीं टाटा मोटर्स नेक्सन और हैरियर के डीजल इंजन को बीएस6 उत्सर्जन मानकों के मुताबिक अपग्रेड करेगी, जबकि टाटा टिगोर और टाटा टियागो को केवल पेट्रोल इंजन के साथ ही बेचा जाएगा।
1 अप्रैल 2020 से बीएस-6 (भारत स्टेज 6) मानक लागू होने हैं और टाटा की दोनों ही कारों में बीएस-6 मानक वाले इंजन नहीं लगे हैं। जिन्हें अपग्रेड करने के लिए अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ेगी और टाटा इस अतिरिक्त बोझ से बचना चाहती है। इससे पहले मारुति ने भी अपनी कारों में डीजल इंजन अपग्रेड करने को लेकर पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि इन इंजनों को अपग्रेड करने में ज्यादा खर्च पड़ेगा और बेहतर है कि सीएनजी पर निर्भरता बढ़ाई जाए।