जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अपने दो पन्ने के आदेश में कहा कि मोटर वाहन नियम केवल लाइसेंस के लिए अप्लाई करने वालों के लिए ही नहीं है, बल्कि सड़क पर चल रही आम जनता का भी ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उन लोगों को किसी भी प्रकार का ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता, जो रोड साइन पढ़ने में अक्षम है और मानवीय सुरक्षा के लिए सड़क पर लगे चेतावनी बोर्ड्स को नहीं पढ़ सकते हैं।
उन्होंने राज्य ट्रांसपोर्ट अथारिटी को आदेश दिया कि वो इस मामले में एक दिशानिर्देश तैयार करे, साथ ही उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करे, जिन्हें लाइसेंस जारी हो चुके हैं और पढ़ने-लिखने में अक्षम हैं।
साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ता दीपक सिंह की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अनपढ़ लोगों को हैवी मोटर लाइसेंस जारी करने का अनुरोध किया था। दीपक सिंह ने याचिका में लिखा था कि उनके पास पिछले 13 सालों से लाइट मोटर व्हीकल का लाइसेंस है। अपने आदेश में अदालत ने याचिकाकर्ता और उसके जैसे लोगों को जारी लाइसेंस को वापस लेने का आदेश सुनाया।
गौरतलब है कि मोटर वाहन नियम या केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों में लाइट मोटर व्हीकल का लाइसेंस जारी करने को लेकर कोई न्यूनतम शैक्षणिक पात्रता निर्धारित नहीं है। वहीं केवल हैवी मोटर लाइसेंस या कॉमर्शियल लाइसेंस लेने के लिए आठवीं पास होना जरूरी है।