वाहनों की कीमत में 1-3 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव
ऑटो कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से दूसरी बार दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो वाहनों की कीमत में 1-3 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है। महिंद्रा एंड महिंद्रा, आयशर मोटर्स और अशोक लेलैंड अप्रैल-मई के बीच अपने वाहनों के दामों में एक बार फिर से बढ़ोतरी कर सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि एलुमीनियम, स्टील और दूसरी धातुओं के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है।
रॉयल एनफील्ड बाइक्स की कीमतों में औसत 3.4 फीसदी
रॉयल एनफील्ड भी दाम फिर से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। हाल ही में कंपनी ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली Royal Enfield Classic 350 की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की है। कंपनी ने Classic 350 की कीमतों में अभी तक 6,289 रुपये का इजाफा हुआ है। दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक दो महीने की अवधि में, रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों की कीमतों में औसत 3.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के चलते ये फैसला लिया गया है। आयशर जल्द ही कॉमर्शियल के साथ रॉयल एनफील्ड की बाकी गाड़ियों के दामों में जल्द ही बढ़ोतरी करेगी।
वहीं कॉमर्शियल वाहनों की कीमत में बढ़ोतरी तब हुई है जब पिछले दो साल से कम बिक्री की मार से जूझ रहे ट्रक मार्केट ने हाल ही में कुछ रफ्तार पकड़नी शुरू की थी। अशोक लेलैंड का कहना है कि उन्होंने पिछले साल अक्तूबर और इस जनवरी में ही ट्रकों के दामों में बढ़ोतरी की थी, लेकिन पिछले कुछ समय से स्टील और बाकी जरूरी धातुओं के दाम बढ़े हैं। अगर यह जारी रहता है तो उनके पास ही दाम बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा।
ट्रक निर्माताओं पर असर
वहीं ट्रक निमार्ताओं को दाम बढ़ने से काफी बुरा असर पड़ा है। पहले तो उत्सर्जन मानकों बीएस4 से सीधे बीएस6 में शिफ्ट करना पड़ा, जिसके चलते दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी करनी पड़ी। वहीं कॉमर्शियल वाहनों का बाजार पहले से कमजोर था। जबकि तीसरी तिमाही में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई और वाहनों के दाम फिर से बढ़ाने पड़े। एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल अप्रैल से लेकर दिसंबर तक ट्रकों की बिक्री में 54 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।
सेमीकंडक्टर चिप की कमी
महिंद्रा ने भी कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में ही दामों में बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा सेमीकडंक्टर चिप की सप्लाई में अभी भी दिक्कत बनी हुई है, जो जून से जुलाई तक ही सामान्य हो सकती है। गौरतलब है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास स्टील और सेमी कंडक्टर चिप की शॉर्टेज हो गई है, यह चिप विदेश से आयात की जाती है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बन रही नई मॉडर्न कारों में इस सेमीकंडक्टर चिप की काफी जरूरत होती है। जिसका असर कारों की डिलीवरी पर भी पड़ रहा है।
स्टील सप्लाई की है शॉर्टेज
स्टील मिलों ने जनवरी में स्टील के दामों में बढ़ोतरी की थी और कीमतें 7250 रुपये प्रति टन कर दी थीं। लेकिन अभी मांग में नरमी आई है। स्टील मिलों और ऑटो कंपनियों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन बड़ी समस्या सप्लाई की है। अगर ऑटो कंपनियां 100 टन स्टील की सप्लाई का ऑर्डर दे रही हैं, तो उन्हें केवल 20-30 टन की ही सप्लाई की जा रही है। कीमतों में बढ़ोतरी का असर स्टील निर्माताओं पर भी पड़ रहा है। क्योंकि स्टील निर्माता तीसरी तिमाही में ही फोर्जिंग क्वॉलिटी की स्टील की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी कर चुके हैं, जबकि अक्तूब-दिसंबर में ही दूसरी तरह की स्टील की कीमतों में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है।