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Electric Vehicles पर केंद्र ने अपनी खुद की नीति का नहीं किया पालन, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

Fri, 17 Jan 2020 02:36 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक वाहनों, सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। 

दरअसल उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर सभी सरकार गाड़ियां और सार्वजनिक वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपनाई जाए। इससे भी प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इस दिशा में सरकार अपनी खुद की नीति को अब तक लागू नहीं कर पाई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
याचिका में वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के लिए सभी सार्वजनिक वाहनों और सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की केंद्र की नीति के क्रियान्वयन का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर यचिका का संज्ञान लेते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। सड़क परिवहन मंत्रालय को चार सप्ताह के अंदर नोटिस का जवाब देना है।
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electric car charging stations (सांकेतिक)
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की अपनी खुद की नीति का पालन करने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं की है। 

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Electric car charging - फोटो : Google
इस संगठन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह योजना वायु प्रदूषण पर रोक लगाने और कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों को ठीक से चार्ज करने के लिये बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। 
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चार्जिंग पॉइंट - फोटो : Social
पिछले वर्ष मार्च में शीर्ष अदालत ने केंद्र को यह बताने के लिए कहा था कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए उसने अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं। पीठ ने इस याचिका को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है।
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