अगर आप महीने में 22 दिन ऑफिस जाते हैं और इसके लिए कैब (WagonR) का इस्तेमाल करते हैं और आपका घर से ऑफिस आना-जाना 60 किलोमीटर है। इसके लिए प्रतिदिन आपका कैब का खर्चा 600 रुपये आता है तो महीने का कैब का खर्चा 600x22=13,200 रुपये बनता है। वही पांच साल में आपका कैब का खर्चा 7.92 लाख रुपये आएगा।
कैब से यात्रा करने के फायदे
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ट्रैफिक में ड्राइव करने से आजादी मिलती है
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आप टेंशन फ्री सफर करते हैं
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पार्किंग का झंझट नहीं
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नए ट्रैफिक नियमों के भारी-भरकम चालान से आजादी
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सर्विस कराने से मुक्ति
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हर साल इंश्योरेंस कराने से आजादी
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PUC कराने से छुटकारा
अब बात करते हैं पर्सनल कार की, यदि आप एक नई कार (मारुति सुजुकी वैगन-आर, LXi, 1.0 लीटर) खरीदते हैं जिसकी दिल्ली में ऑन रोड कीमत करीब पांच लाख रुपये है। अब मान लीजिये आप इस कार को 5 साल के लिए EMI पर लेते हैं। और ठीक उसी प्रकार इस्तेमाल करते हैं जैसे कैब, तो आपकी जेब पर कितना असर पड़ता है ? आइये जानते हैं...
मारुति सुजुकी वैगन-आर (पर्सनल कार के तौर पर)
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मारुति सुजुकी वैगन-आर 1.0L (LXi )
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ऑन रोड कीमत पांच लाख रुपये है
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लोन राशि : 3.90 लाख रुपये (5 साल)
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डाउन पेमेंट: 1.10 लाख रुपये
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EMI: 8,383 रुपये
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रेट ऑफ इंटरेस्ट: 10.50 फीसदी
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5 साल में आप 1.12 रुपये एक्स्ट्रा देंगे
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5,00000+1,20,000=6.20 लाख रुपये (पांच साल में कुल कार की कीमत)
तो यहां पांच साल में कार आपको 6.20 लाख रुपये की पड़ती है। अगर आप 22 दिन ऑफिस अपनी कार से जाते हैं, और आप रोजाना 60 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। तो रोजाना आप अपनी यात्रा पर कितना खर्च करते हैं आइये समझते हैं...
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मारुति सुजुकी वैगन-आर
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माइलेज : 12-15 kmpl (औसतन)
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रोजाना का सफर: 30 किलोमीटर
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पेट्रोल की कीमत: 71.89 रुपये लीटर (14 सितम्बर 2019)
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औसतन रोजाना पेट्रोल की जरूरत: 3 लीटर, यानी 71.89X3=215 रुपये
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पार्किंग चार्ज: 20 रुपये प्रति/घटें
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8 घटें की शिफ्ट के हिसाब से 160 रुपये पार्किंग
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कुल खर्च: 215+160=375 रुपये रोजाना का खर्च (औसत)
(लेकिन हकीकत यह है कि कोई भी अपनी कार में 215 रुपये का पेट्रोल तो डलवाता, दिल्ली के पेट्रोल पंप के मैनेजर से जब इस बारे में पूछा तो पता चला कि कार वाले कम से कम 500 रुपये का पेट्रोल डेली डलवाते हैं )
एक तरफ जहां आप ऑफिस आने-जाने कैब पर रोजाना 600 रुपये खर्च करने के अलावा दूसरा कोई पैसा खर्च नहीं करते वहीं अपनी पर्सनल कार खरीदने के बाद आपके खर्चे काफी बढ़ जाते हैं। एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाले करन शर्मा बताते हैं कि मैं रोजाना मालवीय नगर से गुरुग्राम तक का सफ़र कैब से करता हूं और मेरा रोजाना का किराया 350 रुपये से आस-पास आता है। मुझे ट्रैफिक में कार चलाना पसंद नहीं है इसलिए मैं कैब का इस्तेमाल करता हूं।
वही रोहिणी से ओखला एक पीआर कंपनी में जॉब करने वाली नेहा शर्मा बताती है कि मैं अपनी कार से कई बार ऑफिस आती हूं लेकिन दिल्ली में इतना जाम लगता है कि रोजाना इतना दूर ड्राइव कर पाना मुश्किल है इसलिए मैं कैब से या फिर मेट्रो से सफर करती हूं, लेकिन अपनी कार से मैंने वीकेंड पर जाना पसंद करती हूं।
वहीं मुंबई में प्रोडक्शन हाउस में कम करने वाले नरेन्द्र खुराना बाते हैं कि मैं कैब का इस्तेमाल रोजाना नहीं करता क्योकिं मुझे दिन कई बार बार एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाना पड़ता है ऐसे में मैं अपनी कार से जाना बेहतर समझता हूं, दो-तीन बार कैब से जाने की कोशिश की थी पर मुझे ज्यादा बिल चुकाना पड़ा
दोस्तों अब सवाल यह आता है कि क्या कैब वाकई पर्सनल कार से सस्ती पड़ती है ? या पर्सनल कार ही बेहतर है? लोगों से बात करने के बाद भी हमें मिली जुली प्रकिया मिली हैं, कैब और पर्सनल कार दोनों के अलग-अलग फायदे हैं ऐसे में यह आपको तय करना है कि आपके लिए क्या बेहतर है।